ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। करीब 10 लाख छात्रों के शैक्षिक अधिकारों की रक्षा के लिए नागरिक अधिकार समूह सोशल ज्यूरिस्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। यह याचिका दिल्ली सरकार के शिक्षा सचिव संजीव आहूजा के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें अदालत के आदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।
अवमानना याचिका क्यों दायर हुई?
याचिका में कहा गया है कि शिक्षा सचिव ने हाई कोर्ट को पहले दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया। इसलिए उनके खिलाफ ‘अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971’ की धारा 11 और 12 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। एनजीओ का आरोप है कि यह लापरवाही जानबूझकर और इरादतन की गई है।
छात्रों को अब तक नहीं मिली किताबें
याचिका के अनुसार, 2026-27 का शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को किताबें और कॉपियां नहीं दी गई हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि बिना पढ़ाई सामग्री के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
गर्मी की छुट्टियों से पहले बढ़ी चिंता
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि 9 मई 2026 से स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं। ऐसे में छात्र लंबे समय तक बिना किताबों के रह जाएंगे, जिससे उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
हाई कोर्ट को दिया गया था आश्वासन
एनजीओ के वकीलों का कहना है कि 8 अप्रैल 2024 को हुई सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि किताबें समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद 4 जुलाई 2024 को कोर्ट ने इस संबंध में आदेश भी जारी किया था। फिर भी अब तक इन आदेशों का पालन नहीं किया गया, जो कि गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
नोटिस के बावजूद नहीं मिला जवाब
याचिकाकर्ताओं ने 23 अप्रैल 2026 को शिक्षा सचिव को एक कानूनी नोटिस भी भेजा था। लेकिन इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी के बाद मजबूर होकर उन्होंने कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की।
जल्द होगी हाई कोर्ट में सुनवाई
इस मामले की सुनवाई जल्द ही दिल्ली हाई कोर्ट में होने की उम्मीद है। अब यह देखना अहम होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या शिक्षा विभाग को जवाबदेह ठहराया जाता है। इस पूरे मामले ने दिल्ली के लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत में देरी होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
दिल्ली में किताबों की कमी का यह मामला सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। सोशल ज्यूरिस्ट की यह पहल अब इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश है कि बच्चों को उनका हक समय पर मिल सके। अब सभी की नजर कोर्ट के फैसले पर है, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!