ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद संसद की राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।इस निर्णय के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या 10 से घटकर केवल 3 रह गई है।
कौन-कौन सांसद बीजेपी में शामिल हुए?
इस फैसले के तहत जिन सात सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दी गई है, उनमें शामिल हैं— राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी। अब ये सभी सांसद आधिकारिक रूप से बीजेपी संसदीय दल का हिस्सा माने जाएंगे।
सीएम रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह निर्णय विकसित भारत के संकल्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से प्रेरित है। सीएम ने लिखा कि यह कदम देश की राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है और इससे संसद में अनुभव और मजबूती आएगी। उन्होंने आगे कहा कि इन सांसदों का अनुभव देश के विकास को नई दिशा और ऊर्जा देगा।
“राष्ट्रहित में लिया गया निर्णय” – सीएम
रेखा गुप्ता ने अपने बयान में कहा कि झूठ और अराजक राजनीति को छोड़कर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना एक सराहनीय कदम है। उन्होंने सभी सांसदों को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
आप पार्टी की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इसे एकतरफा निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी। संजय सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने सभापति को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और उम्मीद जताई है कि संविधान और लोकतंत्र के नियमों के अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।
राजनीतिक असर
इस फैसले के बाद राज्यसभा में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। बीजेपी की ताकत बढ़ी है, जबकि आम आदमी पार्टी की संख्या में भारी गिरावट आई है। इसे भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
राज्यसभा में सात सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर सीएम रेखा गुप्ता ने इसे सकारात्मक कदम बताया है, वहीं दूसरी ओर आप पार्टी ने इस पर सवाल उठाए हैं। आने वाले दिनों में इस फैसले के राजनीतिक और कानूनी असर और भी स्पष्ट होंगे।
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