ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के रामलीला मैदान के पास स्थित तुर्कमान गेट क्षेत्र में एमसीडी ने हाईकोर्ट के आदेश पर देर रात अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन पर बने ढांचे हटाए गए। देर रात करीब 1 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर और दुकानों को ध्वस्त किया गया। कुल 17 बुलडोज़र लगाए गए। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन की भारी तैनाती रही।
भीड़ का पथराव, पुलिस ने किया हालात नियंत्रित
कार्रवाई के दौरान फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास मौजूद भीड़ ने पथराव किया। भीड़ बैरिकेडिंग तोड़कर मौके तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को पीछे हटाया और स्थिति पर नियंत्रण पाया। पथराव में 4–5 अधिकारियों को मामूली चोटें आने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि पूरे इलाके में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात हैं और हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं।
इलाके को जोनों में बांटकर निगरानी
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने बताया कि पूरे क्षेत्र को 9 जोनों में बांटा गया है। हर जोन की जिम्मेदारी ADCP स्तर के अधिकारी को दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। डीसीपी निधिन वलसन ने कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है और मलबा हटाने का काम जारी है। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर पथराव करने वालों की पहचान करेगी।
क्या था जमीन विवाद का मामला
फैज-ए-इलाही मस्जिद की प्रबंधन समिति ने एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। एमसीडी ने कहा था कि मस्जिद के बाहर 0.195 एकड़ अतिरिक्त जमीन पर बने ढांचे अवैध हैं और उनके मालिकाना हक के दस्तावेज पेश नहीं किए गए। यह आदेश 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निर्देशों के आधार पर जारी हुआ था। इसमें सड़क, फुटपाथ, पार्किंग, बारात घर और एक निजी क्लिनिक के अतिक्रमण हटाने की बात कही गई थी।
मस्जिद प्रबंधन समिति की आपत्ति
समिति का कहना है कि विवादित जमीन वक्फ संपत्ति है और इसके लिए वक्फ बोर्ड को लीज किराया दिया जाता है। समिति ने स्पष्ट किया कि उन्हें अतिक्रमण हटाने पर आपत्ति नहीं है और बारात घर व क्लिनिक का संचालन बंद किया जा चुका है। उनकी मुख्य आपत्ति कब्रिस्तान क्षेत्र को लेकर है, जिसके संरक्षण की मांग की गई है।
हाईकोर्ट की कार्यवाही और अगली सुनवाई
6 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने एमसीडी, शहरी विकास मंत्रालय, डीडीए, दिल्ली वक्फ बोर्ड सहित अन्य संबंधित पक्षों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि मामला सुनवाई योग्य है और अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी, हालांकि पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप से हालात काबू में हैं। कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला अदालत में लंबित है। स्थानीय लोगों, प्रशासन और अदालत—तीनों की नजर अब आगामी सुनवाई और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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