ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में अनियमितता के कारण कई राज्यों में होटल और रेस्टोरेंट लगभग 20 फीसदी तक बंद हो गए हैं। बाहर खाने पर निर्भर रहने वाले बैचलर और अन्य लोग अब अपनी पसंदीदा डिश के लिए तरस रहे हैं।
दिल्ली के कनॉट प्लेस में हालात
दिल्ली का कनॉट प्लेस (CP) भी इस संकट से अछूता नहीं है। यहां के फेमस फूड जॉइंट्स को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। सीपी के मशहूर छोले-भटूरे की दुकान ने एलपीजी संकट के चलते अपने मेनू में बदलाव कर दिया है। पोस्टर पर लिखा है – “अब सिर्फ चावल ही मिलेगा”.
यह दुकान दशकों से छोले-भटूरे के लिए मशहूर रही है। लोग मीलों दूर से इसका स्वाद चखने आते थे, लेकिन अब एलपीजी की कमी ने इस परंपरा को रोक दिया है।
फूड बिजनेस और होटल इंडस्ट्री पर असर
एलपीजी आपूर्ति में अनियमितता के कारण रेस्टोरेंट्स में व्यंजन बनाने में कठिनाई, लागत बढ़ना और कर्मचारियों के वेतन को लेकर चिंता पैदा हो गई है। कई प्रतिष्ठान वैकल्पिक इंतजामों के जरिये संचालन कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक बाधा बनी रही तो छोटे व्यवसायों के लिए प्रबंधन करना मुश्किल हो सकता है।
शाहदरा स्थित 'अर्बन कबाब' और 'द पियानो मैन' जैसी रेस्टोरेंट चेनें इस संकट से प्रभावित हैं। एलपीजी स्टॉक खत्म होने के कारण रसोई संचालन में बाधा आ रही है। कुछ व्यंजन अब बिना गैस के बनने वाले विकल्पों पर निर्भर हैं।
सरकार का कदम और प्राथमिकता नीति
सरकार ने इस संकट को देखते हुए निर्णय लिया है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस, पाइप गैस और सीएनजी को पहले घरों और प्राथमिक उपयोग के लिए दिया जाएगा। इसके बाद ही औद्योगिक और कमर्शियल उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इस नीति का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचे और कालाबाजारी और जमाखोरी की स्थिति न बने।
इंडियन गैस लिमिटेड (IGL) की भूमिका
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने भी इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। उन्होंने रेस्टोरेंट्स को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि बिना गैस के कौन-कौन से व्यंजन बनाए जा सकते हैं। इसके लिए वैकल्पिक रसोई गैस और अन्य ईंधन विकल्पों का उपयोग किया जा रहा है।
ईरान-इजरायल संघर्ष का असर अब भारत की रसोई और फूड इंडस्ट्री तक पहुंच चुका है। दिल्ली के कनॉट प्लेस के फेमस छोले-भटूरे की दुकान, बड़े होटल और छोटे रेस्टोरेंट एलपीजी संकट से प्रभावित हैं। सरकार की प्राथमिकता नीति और वैकल्पिक ईंधन का उपयोग उद्योगों को अस्थायी राहत दे रहा है, लेकिन लंबी अवधि में व्यवधान से व्यवसाय और आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रशासन और उद्योग दोनों को मिलकर वैकल्पिक कदम उठाने होंगे ताकि नागरिकों और व्यवसायों पर संकट का असर कम से कम पड़े
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