ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के Jawaharlal Nehru University (जेएनयू) में एक बार फिर छात्रों के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। रविवार देर रात हुई इस घटना में पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगे हैं, जिससे कई छात्र घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, 12 से 14 छात्रों को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी तक आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है और वे घटना की जांच कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुई झड़प?
छात्र संगठनों के मुताबिक, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब वामपंथी छात्र समूहों से जुड़े छात्रों ने पढ़ाई कर रहे कुछ छात्रों को घेर लिया और मारपीट की। दूसरी ओर, वाम संगठनों का दावा है कि हमला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से किया गया। दोनों गुट एक-दूसरे पर पत्थरबाजी और हिंसा भड़काने के आरोप लगा रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि झड़प के दौरान कई छात्र घायल हुए हैं।
प्रदर्शन और विवाद की पृष्ठभूमि
जेएनयू छात्र संगठन (JNUSU) ने हाल ही में वाइस-चांसलर Shantisree Dhulipudi Pandit के इस्तीफे और निष्कासन से जुड़े आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर ‘समता जुलूस’ निकाला था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और विरोध को दबाने के लिए एबीवीपी के छात्रों को सामने लाया गया।
वामपंथी छात्र संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान उन पर हमला किया गया, जबकि एबीवीपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। एबीवीपी का कहना है कि झड़प की शुरुआत वाम संगठनों की ओर से हुई और बाद में हिंसा बढ़ गई।
एबीवीपी और वाम संगठनों के अलग-अलग दावे
एबीवीपी नेताओं का कहना है कि वामपंथी गुटों ने छात्रों पर संगठित तरीके से हमला किया। उनके अनुसार, 300 से 400 नकाबपोश लोग स्टडी रूम में घुस आए और छात्रों को बाहर निकाल दिया। एबीवीपी के छात्र नेता विजय जयसवाल पर भी मॉब लिंचिंग का आरोप लगाया गया है।
एबीवीपी का दावा है कि पुलिस और जेएनयू सुरक्षा गार्ड मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। संगठन ने इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वाम संगठनों का पक्ष
दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने एबीवीपी पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण मार्च निकाला जा रहा था, लेकिन एबीवीपी ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। वाम संगठनों का आरोप है कि पुलिस और सुरक्षा गार्ड मौजूद होने के बावजूद स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, जिससे हिंसा बढ़ गई।
पुलिस की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत मिलने की पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि वे घटना की जांच कर रहे हैं और सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पुलिस यह भी देख रही है कि हिंसा किन परिस्थितियों में भड़की और इसमें कौन-कौन शामिल था।
छात्रों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर जेएनयू परिसर में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि कैंपस में पढ़ाई और शांति का माहौल होना चाहिए, लेकिन बार-बार होने वाली झड़पें चिंता का विषय हैं। वामपंथी संगठनों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, जबकि एबीवीपी का कहना है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा की गई।
आगे क्या?
फिलहाल, पुलिस और प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं। छात्रों ने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और कैंपस में शांति सुनिश्चित की जाए। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ छात्रों की पढ़ाई पर असर डालती हैं, बल्कि देशभर में शिक्षा संस्थानों की छवि पर भी सवाल खड़े करती हैं। उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
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