ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में हुए संसदीय चुनावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए उन्हें “सुनियोजित तमाशा” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुईं और मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आईं। शेख हसीना ने चुनाव रद्द करने और एक निष्पक्ष केयरटेकर सरकार के तहत दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।
चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
शेख हसीना ने कहा कि चुनाव पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदान से पहले ही कई जगह बूथ कैप्चरिंग, गोलीबारी, वोट खरीदने और जबरदस्ती बैलेट पेपर पर मुहर लगाने जैसी घटनाएं शुरू हो गई थीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदायों को धमकाया गया, जिससे चुनाव का माहौल निष्पक्ष नहीं रह सका। हसीना के अनुसार, इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और इससे जनता का भरोसा चुनावी प्रक्रिया से उठ सकता है।
अवामी लीग की भागीदारी न होना बड़ा मुद्दा
शेख हसीना ने अंतरिम प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की भागीदारी के बिना चुनाव कराए गए, जो पूरी तरह गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे लाखों समर्थकों के पास कोई उम्मीदवार नहीं बचा।
उनका कहना है कि पार्टी की गैरमौजूदगी के कारण कई मतदाताओं ने चुनाव का बहिष्कार किया। इससे मतदान प्रतिशत काफी कम रहा, जो चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
मतदाताओं की कम भागीदारी पर सवाल
शेख हसीना ने चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मतदान के पहले कुछ घंटों में ही कम वोटर टर्नआउट देखने को मिला। उन्होंने दावा किया कि राजधानी ढाका सहित कई क्षेत्रों में मतदान केंद्र खाली दिखाई दिए।
हसीना ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में वोटरों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ाई गई, जो संदेह पैदा करती है। उनके मुताबिक यह संकेत देता है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।
अंतरिम प्रशासन पर निशाना
शेख हसीना ने अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूनुस के नेतृत्व में कराया गया चुनाव निष्पक्ष नहीं था। हसीना ने उनसे इस्तीफा देने की मांग करते हुए राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और पार्टी कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष माहौल में चुनाव नहीं कराए जाएंगे, तब तक लोकतंत्र बहाल नहीं हो सकता।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और नया राजनीतिक विवाद
दूसरी ओर, विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) ने भी चुनाव को लेकर कई मुद्दे उठाए हैं। पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान शेख हसीना के प्रत्यर्पण को बड़ा मुद्दा बनाया था।
बीएनपी का आरोप है कि भारत द्वारा शेख हसीना को शरण देने से बांग्लादेश की न्याय प्रक्रिया और संप्रभुता प्रभावित हो रही है। इससे देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
अंतरिम सरकार का पक्ष
हालांकि अंतरिम सरकार ने चुनाव प्रक्रिया का बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि चुनाव संवैधानिक तरीके से और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच कराए गए। चुनाव अधिकारियों ने दावा किया कि कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण रहा। सरकार का कहना है कि इन चुनावों के जरिए देश में स्थिर सरकार बनने का रास्ता साफ होगा और राजनीतिक स्थिति सामान्य होगी।
2024 के राजनीतिक बदलाव के बाद अहम चुनाव
यह चुनाव बांग्लादेश की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद शेख हसीना का 15 साल लंबा शासन समाप्त हो गया था। इसके बाद अंतरिम प्रशासन ने देश की सत्ता संभाली और नई सरकार चुनने के लिए चुनाव कराए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनावों के परिणाम बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा तय करेंगे और यह तय करेंगे कि देश लोकतांत्रिक स्थिरता की ओर बढ़ेगा या राजनीतिक टकराव और बढ़ेगा।
आगे क्या होगा?
शेख हसीना द्वारा चुनाव रद्द करने की मांग और विपक्ष के आरोपों के बाद बांग्लादेश की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। यदि चुनाव प्रक्रिया पर विवाद जारी रहता है, तो देश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन सकती है।
अब सभी की नजर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और देश के अंदर होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बांग्लादेश में दोबारा चुनाव होंगे या मौजूदा परिणामों के आधार पर नई सरकार का गठन किया जाएगा।
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