ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिका और बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते के बाद बांग्लादेश से आने वाले सामान पर लगने वाला जवाबी टैरिफ घटाकर 19% कर दिया गया है।
यह खबर बांग्लादेश के लिए इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उसका
रेडीमेड गारमेंट (कपड़ा) सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और अमेरिका उसका
बड़ा बाजार है।
समझौते में एक खास बात यह भी है कि अगर बांग्लादेश में कपड़े
अमेरिका के बने कच्चे माल से तैयार किए जाएंगे, तो ऐसे कुछ
कपड़ों को अमेरिका में बिना टैक्स के भेजा जा सकेगा।
इस फैसले का
असर सिर्फ सरकारी कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगा। फैक्ट्रियों में काम करने वाले
लोगों की नौकरी, छोटे सप्लायर, ट्रांसपोर्ट, और एक्सपोर्ट से जुड़े हजारों काम इस
तरह के टैरिफ बदलाव से सीधे जुड़ते हैं।
टैरिफ कम होने का मतलब अक्सर यह होता है कि विदेश में सामान थोड़ा
सस्ता पड़ता है और ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
यही वजह है कि इस डील को बांग्लादेश में “राहत” के तौर पर देखा जा
रहा है।
9 महीने की बातचीत, फिर 19% पर सहमति
रिपोर्ट के
मुताबिक टैरिफ में यह कटौती करीब नौ महीने चली बातचीत के बाद हुई है।
शुरुआत में अमेरिका ने अप्रैल में बांग्लादेश से आने वाले सामान पर 37%
तक टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा था।
लंबी बातचीत के बाद पिछले साल अगस्त में इसे 20% कर दिया गया था और अब इसे 19% तक और घटाया गया है।
अंतर भले 1%
का दिखे, लेकिन बड़े व्यापार में 1% भी बहुत मायने रखता है।
कई बार कंपनियां ऑर्डर देते समय टैरिफ, शिपिंग
और लागत जोड़कर आखिरी दाम तय करती हैं, और वहीं पर 1%
का फर्क भी “ऑर्डर किसे मिलेगा” तय कर देता है।
यही कारण है कि इस बदलाव पर बांग्लादेश के उद्योग जगत की नजर लंबे
समय से थी।
ड्यूटी-फ्री एक्सेस: डील का सबसे बड़ा पॉइंट
समझौते के
मुताबिक,
अगर बांग्लादेश में कपड़े अमेरिका के कच्चे माल से बनते हैं,
तो ऐसे कुछ कपड़े अमेरिका में बिना टैक्स के भेजे जा सकेंगे।
बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने भी सोशल
मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यही बात कही कि अमेरिका इस व्यवस्था
पर मान गया है।
सरल शब्दों में, यह एक तरह से “सप्लाई चेन
डील” है—अमेरिका का कच्चा माल, बांग्लादेश में उत्पादन,
और फिर अमेरिकी बाजार में आसान एंट्री।
इस तरह की
व्यवस्था से दोनों तरफ फायदा देखा जाता है।
अमेरिका का कच्चा माल बिकेगा, बांग्लादेश की
फैक्ट्रियों को काम मिलेगा और अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
हालांकि इसका असली फायदा तभी टिकेगा जब उत्पादन, गुणवत्ता और डिलीवरी समय पर हो—क्योंकि कपड़ा कारोबार में यही तीन चीजें
सबसे बड़ी शर्त हैं।
समझौते पर किसने किए हस्ताक्षर
ढाका से जारी
सरकारी बयान के अनुसार बांग्लादेश की तरफ से वाणिज्य सलाहकार शेख बशीर उद्दीन और
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान ने इस समझौते पर दस्तखत किए।
अमेरिका की तरफ से यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) एंबेसडर जेमीसन ग्रीर ने हस्ताक्षर किए।
ग्रीर ने यूनुस और उनकी टीम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने
समझौते को पूरा करने के लिए अच्छा काम किया है, और यह समझौता
अमेरिका की व्यापार नीति में बांग्लादेश की स्थिति मजबूत करेगा।
ऐसे बयानों का
राजनीतिक मतलब भी होता है।
जब किसी देश का शीर्ष व्यापार प्रतिनिधि खुले मंच पर तारीफ करता है,
तो यह संकेत माना जाता है कि दोनों देश आने वाले समय में सहयोग
बढ़ाने के मूड में हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि दोनों देश
बांग्लादेश में मौजूद गैर-टैरिफ रुकावटों को दूर करने पर मिलकर काम करेंगे।
बांग्लादेश का गारमेंट सेक्टर: कितनी बड़ी कहानी
रिपोर्ट में
बताया गया है कि बांग्लादेश की कुल कमाई का 80% से
ज्यादा हिस्सा रेडीमेड कपड़ा उद्योग से आता है।
इस सेक्टर में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं,
जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, और यह सेक्टर
देश की जीडीपी में करीब 10% का योगदान देता है।
इसी वजह से टैरिफ में कटौती को “नौकरियां बचाने” और वैश्विक कपड़ा
बाजार में बांग्लादेश की जगह मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया गया है।
जब किसी देश की
अर्थव्यवस्था एक सेक्टर पर इतना ज्यादा टिकी हो, तो उस सेक्टर में थोड़ी सी भी उथल-पुथल पूरे देश की कमाई, रोजगार और सामाजिक हालात को प्रभावित कर देती है।
गारमेंट इंडस्ट्री में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं,
इसलिए इसका असर घरों की आय और बच्चों की पढ़ाई तक में दिखता है।
यही वजह है कि इस डील को सिर्फ “टैरिफ न्यूज” नहीं, बल्कि “रोजगार न्यूज” भी कहा जा रहा है।
फैक्ट्रियों की पुरानी चुनौतियां और नया मौका
रिपोर्ट के
मुताबिक उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कम टैरिफ होने से बांग्लादेश की
फैक्ट्रियां अमेरिका के बाजार में टिके रह पाएंगी।
पिछले कुछ सालों में कई फैक्ट्रियां मुश्किल में आईं—उत्पादन लागत
बढ़ना, बिजली-ईंधन महंगे होना, मुद्रा
में उतार-चढ़ाव और विदेशी खरीदारों के सख्त नियम जैसी वजहें बताई गई हैं।
ऐसे में जब टैरिफ कम होता है, तो कंपनियों को
सांस लेने की जगह मिलती है और वे नए ऑर्डर के लिए दाम बेहतर रख पाती हैं।
लेकिन यहां एक
दूसरा पहलू भी है।
अमेरिकी बाजार में टिके रहने के लिए सिर्फ कीमत कम होना काफी नहीं,
सप्लाई समय पर पहुंचना, लेबर और क्वालिटी मानक
पूरे करना और पेपरवर्क भी उतना ही जरूरी है।
टैरिफ कम होना एक “अवसर” है—लेकिन उसे फायदे में बदलना उद्योग की
तैयारी पर निर्भर करेगा।
चुनाव से ठीक पहले डील: टाइमिंग क्यों अहम
रिपोर्ट के
मुताबिक यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश में चुनाव होने हैं और अगस्त 2024
से वहां अंतरिम सरकार चल रही है।
खबर में यह भी बताया गया है कि चुनाव से पहले हालात नाजुक हैं और
अलग-अलग राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए।
ऐसे माहौल में अंतरिम सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अर्थव्यवस्था
संभली हुई है और सरकार भरोसे के लायक है, जिसमें व्यापार
नीति को अहम माना जा रहा है।
चुनाव के समय
“आर्थिक राहत” वाली खबरें राजनीतिक रूप से बहुत मायने रखती हैं।
अगर लोगों को लगे कि नौकरी और कामकाज सुरक्षित हो रहा है, तो माहौल कुछ हद तक शांत भी होता है।
इसी वजह से इस डील की टाइमिंग पर भी चर्चा हो रही है।
अब आगे क्या असर दिख सकता है
टैरिफ 19%
होने और कुछ कपड़ों को ड्यूटी-फ्री भेजने की व्यवस्था से बांग्लादेश
के एक्सपोर्टर्स को अमेरिकी बाजार में बेहतर स्थिति मिल सकती है।
साथ ही गैर-टैरिफ रुकावटों पर मिलकर काम करने की बात से यह संकेत है
कि आगे नियमों, मंजूरी और प्रक्रियाओं में भी बदलाव हो सकते
हैं।
आने वाले महीनों में असली तस्वीर तब साफ होगी जब नए ऑर्डर, फैक्ट्री उत्पादन और रोजगार के आंकड़ों पर इसका असर दिखने लगेगा।
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