ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा युद्ध एक “व्यक्तिगत युद्ध” है और इसका असर वैश्विक राजनीति पर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के संबंध आने वाले समय में और मजबूत होंगे।
“इजरायल 40 साल से चाहता था युद्ध”
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान इलाही ने इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बेंजामिन नेतन्याहू पिछले 40 वर्षों से ईरान के खिलाफ युद्ध चाहते थे। उनके मुताबिक, पहले वे अमेरिकी राष्ट्रपतियों को इसके लिए राजी नहीं कर पाए, लेकिन इस बार उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को समर्थन देने के लिए तैयार कर लिया। इलाही ने इस पूरे संघर्ष को “व्यक्तिगत युद्ध” बताया।
भारत-ईरान संबंध और मजबूत होंगे
इलाही ने जोर देकर कहा कि भारत और ईरान के बीच संबंध हजारों साल पुराने हैं और ये केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते हैं।उनका कहना है कि मौजूदा तनाव के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते और गहरे होंगे। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान का जुड़ाव 5000 साल पुराना है, जो आज भी उतना ही मजबूत है।
प्राचीन काल से जुड़े हैं दोनों देश
इतिहास पर नजर डालें तो भारत और ईरान के संबंध बेहद पुराने हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 2000-3000 ईसा पूर्व के समय में भारत और ईरान के लोग एक ही क्षेत्र से जुड़े हुए थे। बाद में आर्य जनजातियों के आगमन के बाद इन सभ्यताओं का विस्तार अलग-अलग दिशाओं में हुआ, लेकिन सांस्कृतिक समानताएं आज भी देखने को मिलती हैं।
संस्कृति और कला में समानता
प्रागैतिहासिक काल में कुल्ली संस्कृति और ईरान की सूसा सभ्यता के बीच कई समानताएं पाई गई हैं। मिट्टी के बर्तन, डिजाइन और कला के रूप में दोनों क्षेत्रों में अद्भुत समानता देखने को मिलती है। बलूचिस्तान क्षेत्र में भी ऐसी संस्कृतियां विकसित हुईं, जिनका प्रभाव भारत और ईरान दोनों पर पड़ा।
प्राचीन व्यापारिक संबंध
भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंध भी काफी पुराने हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही दोनों देशों के बीच व्यापार होता था। ईरान से भारत में चांदी, सोना, तांबा, फिरोजा और अन्य कीमती धातुएं आती थीं। वहीं भारत से हाथीदांत और अन्य वस्तुएं ईरान भेजी जाती थीं। यह व्यापार फारस की खाड़ी और अरब सागर के रास्ते होता था।
नेहरू और टैगोर ने भी सराहा रिश्ता
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत और ईरान के रिश्तों को बेहद खास बताया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के लोग इतिहास और संस्कृति के लिहाज से एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। वहीं महान कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भी फारस की संस्कृति और सुंदरता की जमकर तारीफ की थी। उनकी नजर में ईरान एक ऐसा देश था, जहां संस्कृति और कला का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
वर्तमान राजनीति में रिश्तों की अहमियत
आज के समय में भी भारत और ईरान के संबंध कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह रिश्ता और भी अहम हो जाता है।
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