ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत के दूसरे दौर में आ रही रुकावट के लिए अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी नीतियों और सैन्य दबाव के चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना विवाद की जड़
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
ईरान का अमेरिका पर आरोप
गालिबाफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने सैन्य हमलों और दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश की है। हालांकि, उनके मुताबिक यह रणनीति सफल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका समुद्री नाकेबंदी जारी रखता है, तो किसी भी तरह का युद्धविराम समझौता संभव नहीं होगा। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह धमकियों के बीच बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है।
बातचीत में क्यों आ रही रुकावट?
इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत का दूसरा दौर फिलहाल अटका हुआ है। ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत को “समर्पण” में बदलना चाहता है, जो उसे मंजूर नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहा है, लेकिन अमेरिकी नीतियां ही सबसे बड़ी बाधा हैं।
हालात कैसे बिगड़े?
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से ही हालात बिगड़ने शुरू हो गए थे। इसके बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात प्रभावित हुआ और ईरान ने भी अपनी रणनीति सख्त कर दी। अमेरिका ने जवाबी कदम उठाते हुए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी, जिससे तनाव और बढ़ गया।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। अब सवाल यह है कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ता अपनाकर इस संकट को सुलझाएंगे या फिर हालात और बिगड़ेंगे। फिलहाल, दुनिया की नजर इस टकराव पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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