ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमले के बाद देश की राजनीति में भारी बदलाव आया। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पद संभालने के करीब 6 हफ्ते बाद भी मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह गायब हैं। न तो उन्हें किसी ने देखा है और न ही उनकी आवाज सीधे सुनी गई है। हालांकि, उनके नाम से कुछ बयान जरूर जारी हो रहे हैं, लेकिन उनकी वास्तविक मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या मोजतबा खामेनेई घायल हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी के हमले में मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे। बताया जा रहा है कि उनके पैरों में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वे ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं और जरूरी फैसले ले रहे हैं। लेकिन इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति और ज्यादा संदिग्ध बन गई है।
फैसले कौन ले रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मोजतबा सामने नहीं आ रहे, तो ईरान में असल फैसले कौन ले रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरानी सिस्टम मोजतबा के नाम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन असली फैसले कहीं और लिए जा रहे हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज के मुताबिक, मोजतबा की भूमिका सीमित हो सकती है और उनका नाम सिर्फ अंतिम मंजूरी के लिए इस्तेमाल हो रहा है।
सरकार के भीतर विरोधाभास
ईरान की सरकार के भीतर भी फैसलों को लेकर विरोधाभास सामने आ रहा है। उदाहरण के तौर पर, विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने की घोषणा की, लेकिन इसके तुरंत बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा कि स्ट्रेट बंद है। इस तरह के विरोधाभासी बयानों ने यह साफ कर दिया है कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी है और फैसलों को लेकर स्पष्टता नहीं है।
जनता और नेतृत्व के बीच दूरी
ईरान के सरकारी मीडिया ने भी माना है कि देश में भ्रम की स्थिति है। फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा कि समाज उलझन में है, जबकि तस्नीम एजेंसी ने बड़े फैसलों के लिए नेतृत्व की मंजूरी को जरूरी बताया है। इससे साफ है कि जनता और सरकार के बीच विश्वास की कमी बढ़ रही है और लोग यह जानना चाहते हैं कि देश का नेतृत्व आखिर कौन कर रहा है।
ट्रंप का दावा और बढ़ता दबाव
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और अमेरिका अब नए लोगों से बातचीत कर रहा है। उनका यह बयान ईरान की स्थिति को और जटिल बना देता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि देश के भीतर सत्ता का संतुलन बदल रहा है।
क्या मोजतबा को जानबूझकर छिपाया जा रहा है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई को जानबूझकर सार्वजनिक जीवन से दूर रखा जा रहा है ताकि उन्हें आंतरिक आलोचना से बचाया जा सके।
उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के विपरीत, जो हमेशा सार्वजनिक रूप से सामने आते थे, मोजतबा की अनुपस्थिति एक रणनीति भी हो सकती है।
ईरान इस समय एक बड़े राजनीतिक और रणनीतिक संकट से गुजर रहा है। मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी, सरकार के भीतर विरोधाभास और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या ईरान में वास्तविक नेतृत्व मौजूद है या फिर फैसले पर्दे के पीछे लिए जा रहे हैं। आने वाले समय में इस रहस्य से पर्दा उठना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
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