ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नेपाल में हाल ही में सत्ता में आए बालेन शाह की सरकार अब मुश्किलों में घिरती नजर आ रही है। छात्र आंदोलनों के बाद बनी इस नई सरकार से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन एक महीने के अंदर ही हालात बदलते दिख रहे हैं। सरकार के गठन के कुछ ही दिनों में दो मंत्रियों के इस्तीफे ने राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंत्रियों के इस्तीफे से बढ़ी चिंता
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और निजी लेन-देन के गंभीर आरोप लगे थे। विपक्ष और सिविल सोसायटी लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इससे पहले श्रम मंत्री दीपक कुमार साह भी अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप में इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को एक अहम पद दिलाने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। लगातार दो मंत्रियों के इस्तीफे से यह साफ हो गया है कि सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
युवाओं और छात्रों में नाराजगी
बालेन शाह सरकार के खिलाफ युवाओं और छात्र संगठनों में भी गुस्सा देखने को मिल रहा है। छात्र संघों पर कार्रवाई और उनकी मांगों को नजरअंदाज करने के आरोपों के चलते प्रदर्शन तेज हो गए हैं। युवा, जो कभी बालेन शाह के सबसे बड़े समर्थक थे, अब सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। यह सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ता तनाव
सरकार के एक फैसले ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बालेन सरकार ने भारत से 100 नेपाली रुपये से ज्यादा का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी है। इस फैसले से उन लोगों पर सीधा असर पड़ा है, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत से सस्ते सामान पर निर्भर रहते हैं। सीमा से लगे इलाकों में लोग इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और कई संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
महंगाई और आर्थिक दबाव
नेपाल की अर्थव्यवस्था भी इस समय दबाव में है। पेट्रोल और अन्य ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे महंगाई बढ़ गई है। आम जनता महंगाई से परेशान है और इसका सीधा असर सरकार की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। आर्थिक हालात सुधारने की चुनौती भी सरकार के सामने खड़ी है।
क्या बालेन शाह पर से भरोसा कम हो रहा?
35 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने बालेन शाह से लोगों को नई उम्मीदें थीं। लेकिन शुरुआती दिनों में ही सामने आई समस्याओं ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि बालेन शाह इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और क्या वे जनता का भरोसा बनाए रख पाते हैं या नहीं।
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