ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) की बंदी को 24 मई 2026 तक बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों में खटास साफ नजर आ रही है। पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण ने ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAM) जारी करते हुए कहा है कि सभी भारतीय पंजीकृत, वाणिज्यिक और सैन्य विमानों को पाकिस्तानी एयरस्पेस में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव
इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के विमानों के लिए अपने-अपने एयरस्पेस बंद कर दिए थे। तब से यह प्रतिबंध लगातार बढ़ाया जा रहा है और अब यह लगभग एक साल पूरा करने वाला है।
‘स्ट्रैटेजिक ब्लैकआउट’ का दावा
पाकिस्तान के इस फैसले पर पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एयरस्पेस बंद करना नहीं है, बल्कि एक “स्ट्रैटेजिक ब्लैकआउट” है। उनके अनुसार, इस कदम के पीछे सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े कारण हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के अंदर इस समय कुछ महत्वपूर्ण गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें छिपाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
CIA-ISI वार्ता और सैन्य अभ्यास का जिक्र
लकी बिष्ट ने यह भी दावा किया कि इस्लामाबाद में CIA और ISI के बीच गुप्त शांति वार्ता चल रही है। इसके अलावा पाकिस्तान और मिस्र के बीच “थंडर-2” नाम का सैन्य अभ्यास भी जारी है। उनका कहना है कि एयरस्पेस बंद करने का मकसद यह है कि कोई भी बाहरी रडार इन गतिविधियों को न देख सके। इसे उन्होंने “जासूसी शील्ड” बताया। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय विमानों पर असर
इस एयरस्पेस बंदी का सबसे ज्यादा असर भारतीय एयरलाइंस पर पड़ा है। विमानों को अब लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे उड़ान का समय और ईंधन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद रखा है और इसे आगे भी बढ़ाने की संभावना है।
पहले भी हो चुका है ऐसा
यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच एयरस्पेस बंद किया गया हो। इससे पहले 1999 के करगिल युद्ध और 2019 के पुलवामा हमले के बाद भी ऐसा कदम उठाया गया था।
पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस बंदी बढ़ाने और ‘स्ट्रैटेजिक ब्लैकआउट’ जैसे दावों ने एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन इस फैसले का असर न सिर्फ भारत-पाक संबंधों पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी साफ नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गंभीर रूप ले सकता है।
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