ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 7 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। आयोग ने यह कार्रवाई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लापरवाही और अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों के बाद की है। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।
चुनाव से पहले सख्ती
पश्चिम बंगाल में कुछ ही सप्ताह में चुनाव की घोषणा होने की संभावना है। ऐसे में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का काम तेज कर दिया था। इसी दौरान कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारियों ने अपने अधिकारों का सही तरीके से उपयोग नहीं किया और कई मामलों में लापरवाही बरती।
चुनाव आयोग ने इसे गंभीर मानते हुए तुरंत प्रभाव से सातों अधिकारियों को निलंबित कर दिया। आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कानून के उल्लंघन का आरोप
आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों ने RP एक्ट 1950 की धारा 13CC के तहत निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया। आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपनी कानूनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया और अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।
जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ही यह सख्त कदम उठाया गया। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही लोकतंत्र के लिए खतरा है।
चीफ सेक्रेटरी को निर्देश
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि सस्पेंड किए गए अधिकारियों के खिलाफ बिना देरी के विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। संबंधित कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने को कहा गया है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी जल्द से जल्द आयोग को भेजी जाए। इससे साफ है कि चुनाव आयोग इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और आगे भी कार्रवाई संभव है।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
सस्पेंड किए गए अधिकारियों में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के AERO और अन्य प्रशासनिक पदों पर तैनात अधिकारी शामिल हैं। इनमें डॉ. सेफौर रहमान (समसेरगंज), नीतीश दास (फरक्का), दलिया रे चौधरी (मयनागुड़ी), स्क. मुर्शिद आलम (सुती), सत्यजीत दास और जॉयदीप कुंडू (कैनिंग पुरबो), तथा देबाशीष बिस्वास (डेबरा) शामिल हैं।
इन सभी पर विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नियमों की अनदेखी और जिम्मेदारी में कमी के आरोप लगे हैं।
आगे क्या?
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को चुनाव से पहले सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि आगे की जांच में अन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही गर्म है और ऐसे में आयोग का यह कदम प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन इस मामले को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
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