ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत की सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को हुई अहम बैठक में कई बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। इस फैसले से देश की हवाई और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
रक्षा खरीद परिषद का बड़ा फैसला
रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। सबसे बड़ा फैसला रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली के लिए 288 मिसाइलें खरीदने का है। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 10 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
इस बैठक में केवल मिसाइल खरीद ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े रक्षा सौदों पर भी मुहर लगी है। इनमें फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान और अमेरिका से समुद्री निगरानी विमान खरीदने का फैसला भी शामिल है। कुल मिलाकर इस बैठक में करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जो भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
नई मिसाइलें खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 प्रणाली से कई मिसाइलें इस्तेमाल की गई थीं। इससे देश के पास मौजूद मिसाइलों का भंडार कम हो गया था। इसी कमी को पूरा करने के लिए अब नई मिसाइलें खरीदने का फैसला लिया गया है।
इस सौदे के तहत 120 छोटी दूरी और 168 लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें खरीदी जाएंगी। इन मिसाइलों को तेजी से खरीदने की योजना बनाई गई है, ताकि भारत की वायु सुरक्षा प्रणाली जल्द ही पूरी ताकत में वापस आ सके। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब रूस से एस-400 प्रणाली के दो और दस्ता इसी साल जून और नवंबर में भारत को मिलने वाले हैं।
चार अलग-अलग दूरी की मिसाइलें होंगी शामिल
नई खरीद में चार तरह की दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें शामिल होंगी। इनमें 400 किलोमीटर, 200 किलोमीटर, 150 किलोमीटर और 40 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधने वाली मिसाइलें होंगी।
ये सभी जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें होंगी। इनकी मदद से दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों को लंबी दूरी से ही खत्म किया जा सकता है। माना जाता है कि ऐसी तकनीक से देश की एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
राफेल और समुद्री निगरानी विमानों की खरीद
बैठक में फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। राफेल विमान अपनी आधुनिक तकनीक और मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इससे भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी।
इसके अलावा अमेरिका से छह समुद्री निगरानी विमान खरीदने पर भी मुहर लगी है। इन विमानों की कीमत लगभग 30 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। इनका इस्तेमाल समुद्री सीमाओं की निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाएगा।
भविष्य में और मजबूत होगी भारत की सुरक्षा
एस-400 प्रणाली की सफलता के बाद भारतीय सेना अब इसके पांच और दस्ता खरीदने की योजना बना रही है। साथ ही रूस से पैंटसर जैसी छोटी दूरी की रक्षा प्रणाली लेने पर भी विचार चल रहा है।
अगर ये सभी योजनाएं पूरी हो जाती हैं, तो भविष्य में भारत के पास एस-400 के कुल 10 दस्ता हो सकते हैं। इससे देश की हवाई सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। खासकर ड्रोन और आधुनिक हवाई खतरों से निपटने में भारत को बड़ी ताकत मिलेगी।
सुरक्षा के लिहाज से अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात और बढ़ते सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। नए रक्षा सौदों से देश की सैन्य ताकत में बड़ा सुधार होगा और सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत हो सकेगी। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला भारत की सुरक्षा नीति को और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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