ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हरियाणा के फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के अंदर हत्या का मामला सामने आया है।
बताया गया कि रविवार रात करीब 2 बजे एक साथी
कैदी ने उस पर हमला कर उसे मार दिया।
जेल के अंदर इस तरह की घटना के बाद सुरक्षा और निगरानी को लेकर कई सवाल
खड़े हो गए हैं।
मृतक अब्दुल रहमान कौन था
अब्दुल रहमान
अयोध्या के इनायतनगर थाना क्षेत्र के मजनाई गांव का रहने वाला बताया गया है।
उसे हरियाणा एसटीएफ ने मार्च 2025 में हरियाणा
के पाली इलाके से गिरफ्तार किया था, और गिरफ्तारी के समय
उसके पास ग्रेनेड मिलने की बात कही गई है।
जांच और पूछताछ में उसके आतंकी संगठन और पड़ोसी देश पाकिस्तान से
संपर्क होने के संकेत मिलने के बाद उसे जेल भेजा गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, उस पर राम मंदिर पर हमले
की साजिश में शामिल होने का भी आरोप बताया गया है।
हत्या का आरोपी: अरुण चौधरी
इस हत्या के
मामले में जेल में बंद साथी कैदी अरुण चौधरी का नाम सामने आया है,
जिस पर अब्दुल रहमान को मारने का आरोप है।
कहा गया है कि सजा/कानूनी प्रक्रिया के बाद अब्दुल रहमान को
फरीदाबाद की नीमका जेल में रखा गया था, और वहीं घटना हुई।
अब जांच का बड़ा सवाल यह भी है कि जेल के अंदर वारदात कैसे हुई,
हथियार या हमला करने का तरीका क्या था, और उस
वक्त निगरानी में क्या कमी रह गई।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी हलचल
इस घटना के बाद
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की चर्चा भी सामने आई है, जिसमें आरोपी अरुण चौधरी का समर्थन करने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह पोस्ट रोहित गोदारा
गैंग की तरफ से बताई गई है, और गैंग के मेंबर महेंद्र डेलाना
के नाम से साझा होने का दावा किया गया है।
पोस्ट में यह भी लिखा होने की बात कही गई कि “जो देश के खिलाफ जाएगा,
उसका यही अंजाम होगा,” और इसी संदेश के साथ
आरोपी का समर्थन दिखाया गया।
पोस्ट में अब्दुल रहमान को “आतंकवादी” बताते हुए, उसके पास ग्रेनेड मिलने और राम मंदिर पर हमले की योजना से जुड़ी बातें भी
लिखी होने का जिक्र है।
परिवार पर क्या बीती
घटना की खबर
मिलते ही परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को अब्दुल रहमान
के पिता अबू बकर बेटे का शव लेने फरीदाबाद के लिए निकले, और
घर पर मां व बहन का रो-रोकर बुरा हाल बताया गया।
ऐसे मामलों में परिवार के सामने एक साथ कई परेशानियां आ जाती
हैं—दुख, कानूनी कागज़ी काम, और आगे की
प्रक्रिया की भागदौड़।
जांच में अब किन बातों पर फोकस
अब एजेंसियों
के लिए यह जानना जरूरी है कि जेल के अंदर हमला किस हालात में हुआ और क्या इसके
पीछे कोई पुरानी रंजिश थी या कोई और वजह।
दूसरा पहलू यह है कि जिस सोशल मीडिया पोस्ट की चर्चा है, वह किस अकाउंट से, कब और किसके कहने पर डाली गई—और
क्या यह किसी तरह से मामले को भड़काने या संदेश देने की कोशिश थी।
जेल प्रशासन की ड्यूटी लिस्ट, सीसीटीवी
रिकॉर्ड (अगर उपलब्ध है), और वार्ड में मौजूद कैदियों के
बयान इस केस में अहम कड़ियां बन सकते हैं।
साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि आरोपी कैदी अरुण
चौधरी के किसी गैंग या बाहरी नेटवर्क से सीधे संपर्क के कोई संकेत तो नहीं हैं,
क्योंकि पोस्ट में समर्थन की बात सामने आने से मामला और संवेदनशील
हो जाता है।
जेल सुरक्षा पर उठते सवाल
जेलें आम तौर
पर सबसे ज्यादा निगरानी वाली जगहों में मानी जाती हैं,
फिर भी अगर किसी कैदी की हत्या अंदर हो जाए तो यह सिस्टम के लिए
गंभीर चेतावनी होती है।
ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर बैरक की तलाशी, ड्यूटी
स्टाफ से पूछताछ, और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव जैसे कदम
लिए जाते हैं, ताकि आगे ऐसी वारदात न हो।
लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि क्या कैदियों के बीच तनाव की
जानकारी पहले से थी, और अगर थी तो उसे समय रहते क्यों नहीं
रोका जा सका।
आगे क्या हो सकता है
अब उम्मीद यही
है कि जांच में साफ हो कि वारदात की असली वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार
है।
अगर सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी बातें जांच में पक्की होती हैं,
तो डिजिटल सबूत और ऑनलाइन गतिविधियों की कड़ी जांच भी इस केस का
हिस्सा बन सकती है।
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