ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। भागवत ने हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की मांग को दोहराया है। उन्होंने कहा कि अगर सावरकर को यह सम्मान दिया जाता है तो इससे भारत रत्न की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
संघ के कार्यक्रम में भागवत ने रखी मांग
मुंबई में आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह बयान दिया। कार्यक्रम के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि सावरकर को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से चली आ रही है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। भागवत के मुताबिक, सावरकर ने देश के लिए बड़ा योगदान दिया है और उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब संघ या बीजेपी से जुड़े नेताओं ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग उठाई हो। पिछले कई वर्षों से यह मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
मोहन भागवत के बयान के बाद कांग्रेस ने इस मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें किस आधार पर यह सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सावरकर के विचारों ने देश के विभाजन की वैचारिक नींव रखी थी।
मसूद ने कहा कि सावरकर ने दो राष्ट्रों का सिद्धांत फैलाया, जिससे भारत और पाकिस्तान के विभाजन का रास्ता तैयार हुआ। कांग्रेस लंबे समय से सावरकर के विचारों और उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाती रही है।
सावरकर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विचार
सावरकर को लेकर देश की राजनीति में दो अलग-अलग विचारधाराएं देखने को मिलती हैं। बीजेपी और उससे जुड़े संगठन सावरकर को एक महान स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख नेता के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि सावरकर ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और जेल की सजा भी काटी, इसलिए उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दल सावरकर के कुछ विचारों और महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े कथित संबंधों के आधार पर उनका विरोध करते रहे हैं। हालांकि, अदालत ने गांधी हत्या मामले में सावरकर को दोषी नहीं ठहराया था, लेकिन राजनीतिक बहस में यह मुद्दा बार-बार उठता रहा है।
पहले भी उठ चुकी है भारत रत्न की मांग
सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पहली बार साल 2019 में बड़े स्तर पर चर्चा में आई थी, जब बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इसका वादा किया था। इसके बाद साल 2024 में शिवसेना (यूबीटी) ने भी यह मांग उठाई थी। अब मोहन भागवत के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
आगे क्या होगा?
सावरकर को भारत रत्न देने का फैसला केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आता है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह विषय और ज्यादा चर्चा में रह सकता है। यह मामला केवल सम्मान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की राजनीति और विचारधारा से भी जुड़ा हुआ है।
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