ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्कता बरती जाती है। खासकर गुजरात के कच्छ और क्रीक इलाके रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। हाल ही में भारतीय सेना ने इन सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैयारियों का व्यापक आकलन किया। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना पहले से ही आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय है।
सीमा पर सैन्य तैयारियों की समीक्षा
दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने गुजरात का दौरा कर सैन्य तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कच्छ और क्रीक सेक्टर में तैनात सेना की रणनीतिक व्यवस्था, ऑपरेशन क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली का निरीक्षण किया।
यह इलाका भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जहां दलदली क्षेत्र और समुद्री सीमाएं सुरक्षा को जटिल बनाती हैं। ऐसे में सेना की तैयारियों का नियमित मूल्यांकन बेहद जरूरी होता है। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी खतरे की स्थिति में भारतीय सेना तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए तैयार रहे।
‘डिफेंस ऑफ गुजरात’ अभ्यास से परखी युद्ध क्षमता
दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने ‘डिफेंस ऑफ गुजरात’ नामक बड़े सैन्य अभ्यास का निरीक्षण किया। इस अभ्यास में सेना की युद्ध तत्परता, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और ऑपरेशन सिस्टम की प्रभावशीलता को परखा गया।
इस अभ्यास ने दिखाया कि भारतीय सेना कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह सक्षम है। गुजरात के अलग-अलग ऑपरेशन क्षेत्रों में सेना की रणनीतिक क्षमता और तैनाती को मजबूत करने में यह अभ्यास महत्वपूर्ण साबित हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की साजिश नाकाम
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि भारतीय सेना की मजबूत रक्षा प्रणाली ने इन सभी हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।
यह घटना भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता और सतर्कता का बड़ा उदाहरण है। सेना लगातार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक और रणनीति का इस्तेमाल कर रही है।
सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहल
दौरे के दौरान भुज सैन्य स्टेशन में एक मेगा नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीमों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम में 120 से अधिक दूरदराज गांवों के करीब 2500 मरीजों की जांच की गई। वहीं 200 से ज्यादा मरीजों की सर्जरी कर उनकी आंखों की रोशनी वापस लाई गई। यह पहल दर्शाती है कि भारतीय सेना सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि समाज सेवा में भी अहम भूमिका निभा रही है।
वीर परिवारों को सम्मान और सांस्कृतिक कार्यक्रम
अहमदाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और AWWA की क्षेत्रीय अध्यक्ष कोमल सेठ ने वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम उन परिवारों के प्रति सेना की संवेदनशीलता और सम्मान को दर्शाता है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्रियजनों का बलिदान दिया।
दौरे का समापन ‘शौर्य संध्या’ कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल हुए। कार्यक्रम में सैन्य शौर्य और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
सुरक्षित और मजबूत भारत की दिशा में कदम
यह पूरा दौरा दिखाता है कि भारतीय सेना न केवल देश की सुरक्षा के लिए मजबूत तैयारी कर रही है, बल्कि समाज सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी उतना ही महत्व देती है। ऐसे प्रयास भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
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