ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी दिखने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने तेजी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में जानकारी दी कि सरकार ने ईंधन, उर्वरक और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई को बनाए रखने के लिए 7 एम्पावर्ड ग्रुप का गठन किया है।
ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट की चिंता
प्रधानमंत्री ने बताया कि करीब तीन हफ्तों से चल रहे इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संभावित बंद होना है। यह समुद्री रास्ता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।
विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कई भारतीय चालक दल फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
7 एम्पावर्ड ग्रुप क्या करेंगे?
सरकार द्वारा बनाए गए 7 एम्पावर्ड ग्रुप, COVID-19 महामारी के दौरान बनी समितियों की तरह काम करेंगे। ये ग्रुप पेट्रोलियम, नेचुरल गैस, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे अहम क्षेत्रों में तुरंत फैसले लेने में सक्षम होंगे। इनका उद्देश्य है कि संकट के दौरान किसी भी तरह की कमी या अव्यवस्था न होने पाए।
वैकल्पिक स्रोतों की तलाश
सरकार अब केवल पारंपरिक तेल और गैस स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत सभी संभावित वैश्विक विकल्पों को तलाश रहा है, ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक सुरक्षित बनाएगा।
किसानों के लिए राहत
आने वाले खरीफ सीजन को देखते हुए सरकार ने उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित कर लिया है। प्रधानमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि इस वैश्विक संकट का असर उन पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। यह कदम कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि युद्ध के बहाने कोई भी जमाखोरी या कालाबाजारी न कर सके। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
सामरिक तेल भंडार बढ़ाने की तैयारी
भारत अपने सामरिक तेल भंडार को भी बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसे 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 6.5 मिलियन मीट्रिक टन करने की योजना है। यह कदम भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने में मददगार साबित होगा।
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है और हर स्तर पर तैयारी कर रही है। सरकार के इन कदमों से यह साफ है कि वह देश की अर्थव्यवस्था, किसानों और आम जनता को इस वैश्विक संकट के असर से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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