ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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देश में बढ़ते बाल तस्करी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि अगर राज्य सरकारें तुरंत ठोस कदम नहीं उठातीं, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए सभी राज्यों और एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
राज्यों की कार्यशैली पर नाराजगी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्यों के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कई राज्यों में राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी साफ दिखाई दे रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ राज्यों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट “आंखों में धूल झोंकने” जैसी हैं, जो जमीनी हकीकत को नहीं दर्शातीं।
कोर्ट के अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बाल तस्करी से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इसमें तस्करी से जुड़े मामलों की सुनवाई छह महीने के भीतर रोजाना आधार पर पूरी करने की बात कही गई है।
इसके अलावा, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को मजबूत करने, जांच प्रक्रिया में सुधार लाने और संवेदनशील इलाकों की पहचान कर निगरानी के लिए समितियां बनाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को तब तक तस्करी माना जाए, जब तक इसके विपरीत साबित न हो जाए।
मेरठ में अवैध निर्माण पर भी सख्ती
बाल तस्करी के मुद्दे के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माणों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शास्त्री नगर क्षेत्र में 859 अवैध संपत्तियों को दो महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इमारतों के चारों ओर अनिवार्य खुले स्थान (सेटबैक) पर हुए सभी अतिक्रमणों को भी हटाया जाए।
“कानून का राज शोर-शराबे से ऊपर”
अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून का राज किसी भी “जनभावना या शोर-शराबे” के आगे नहीं झुक सकता। पीठ ने उत्तर प्रदेश प्रशासन से सवाल किया कि आखिर कैसे स्कूल, अस्पताल और बैंक जैसी संस्थाएं अवैध इमारतों में चल रही हैं। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताया।
लोगों की जान सबसे अहम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों, मरीजों और आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। किसी भी हालत में लोगों की जान जोखिम में डालकर व्यापार नहीं चलाया जा सकता। अदालत को बताया गया कि कई अवैध इमारतों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट के ये दोनों फैसले यह साफ करते हैं कि देश में कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बाल तस्करी जैसे गंभीर अपराध पर सख्ती और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का संदेश स्पष्ट है—अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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