ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीज़फायर का असर अब भारत पर भी सकारात्मक रूप से दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को खोलने पर सहमति बन गई है। इससे भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है, क्योंकि हाल के तनाव के चलते ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही थी।
हॉर्मुज़ खुलने से बढ़ेगी सप्लाई
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने कहा है कि सीज़फायर की शर्तों के तहत अगले दो हफ्तों तक जहाजों को सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ जलमार्ग से गुजरने दिया जाएगा। ईरानी सेना इस प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में सहयोग करेगी। गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा था।
भारत पर क्यों पड़ा था असर?
भारत के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। देश का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से अधिक एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से आता है। जब यह मार्ग बंद हुआ, तो भारत में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि बाद में ईरान ने भारत सहित कुछ देशों को “मित्र” बताते हुए इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी।
भारत की ओर आ रहे LPG टैंकर
सीज़फायर के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। खबर है कि भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से हॉर्मुज़ पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
• ‘ग्रीन सानवी’ टैंकर 46,650 टन एलपीजी लेकर 7 अप्रैल को भारत पहुंचने वाला है।
• ‘ग्रीन आशा’ टैंकर 15,500 टन गैस के साथ 9 अप्रैल को भारतीय तट पर पहुंचेगा।
इसके अलावा, करीब 16 अन्य जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं, जिनमें एलएनजी, कच्चा तेल और अन्य सामान ले जाने वाले पोत शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर भी राहत
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा हॉर्मुज़ को सुरक्षित रूप से खोलने की सहमति मिलने के बाद अमेरिका ने हमले रोकने का निर्णय लिया। इससे न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के कई देशों को राहत मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या उम्मीद?
अब जब हॉर्मुज़ दो हफ्तों के लिए खुल रहा है, तो भारत की ओर आने वाले जहाजों की संख्या बढ़ सकती है। इससे देश में एलपीजी और कच्चे तेल की सप्लाई बेहतर होगी और ईंधन की कमी का दबाव कम होगा।
अमेरिका-ईरान सीज़फायर का यह असर भारत के लिए राहत भरा है। डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बनी सहमति से हॉर्मुज़ जलमार्ग खुलने की दिशा में कदम बढ़ा है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!