ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और हैदराबाद की कंपनी COEMPT Edu Teck के बीच हुए ठेके को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में अब शिक्षा मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है। मंत्रालय ने CBSE से पूरी टेंडर प्रक्रिया की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और संकेत दिए हैं कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब CBSE की डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन (OSM) प्रणाली को संचालित करने के लिए COEMPT Edu Teck को दिया गया ठेका सवालों के घेरे में आ गया।
क्या है पूरा मामला?
CBSE हर साल लाखों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली का उपयोग करता है। इस महत्वपूर्ण कार्य का ठेका COEMPT Edu Teck को दिया गया था। हालांकि बाद में इस सिस्टम को लेकर कई सवाल उठे। आरोप लगाए गए कि प्रणाली में सुरक्षा संबंधी खामियां थीं और डेटा की गोपनीयता को लेकर भी चिंताएं सामने आईं। इसके अलावा कार्यप्रणाली में कथित लापरवाही और तकनीकी कमियों की बात भी उठाई गई।
शिक्षा मंत्रालय ने क्यों मांगी रिपोर्ट?
विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की जानकारी मांगी है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि कंपनी का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया और टेंडर प्रक्रिया में क्या-क्या बदलाव किए गए। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने टेंडर से जुड़े दस्तावेजों और निर्णयों की समीक्षा शुरू कर दी है। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।
टेंडर में था ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान
सबसे बड़ा विवाद टेंडर की शर्तों में किए गए बदलाव को लेकर है। 28 अगस्त 2025 को जारी मूल टेंडर दस्तावेज में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि कंपनी गंभीर लापरवाही करती है या नियमों का बार-बार उल्लंघन करती है तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जब्त करने और अनुबंध समाप्त करने का अधिकार भी CBSE के पास था।
लेकिन 20 सितंबर 2025 को जारी एक संशोधन (Corrigendum) के माध्यम से ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान हटा दिया गया। इसके बाद आर्थिक जुर्माना, सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने और अनुबंध समाप्त करने की शर्तें तो बनी रहीं, लेकिन कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार समाप्त हो गया।
कंपनी पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
मौजूदा अनुबंध के अनुसार CBSE कंपनी पर आर्थिक दंड लगा सकता है। उदाहरण के लिए, गंभीर तकनीकी समस्याओं को दूर करने में हर 15 मिनट की देरी पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी तरह मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) और सुधारात्मक कार्य योजना प्रस्तुत करने में देरी होने पर भी भारी जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा सुरक्षा जमा राशि जब्त करने और अनुबंध समाप्त करने का अधिकार भी CBSE के पास मौजूद है।हालांकि वर्तमान अनुबंध के तहत कंपनी को ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता, यही बात विवाद का प्रमुख कारण बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट मांगने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव किस स्तर पर और किन कारणों से किया गया। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं COEMPT Edu Teck के साथ हुए अनुबंध की भी समीक्षा की जा सकती है।
फिलहाल यह मामला देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्थाओं में से एक CBSE की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
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