ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस को एक अहम सुराग मिला है। जांच एजेंसियों के हाथ ऐसे सबूत लगे हैं, जो हमले के पीछे पाकिस्तान से जुड़े संभावित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में शामिल आतंकियों के पास से बरामद किए गए दो मोबाइल फोन का कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा पाया गया है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब सुरक्षा एजेंसियां हमले की पूरी साजिश और इसके पीछे मौजूद आतंकी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।
आतंकियों के पास मिले थे दो मोबाइल फोन
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को जुलाई 2025 में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था। सुरक्षा बलों ने उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए थे। इनमें एक रेडमी 9T और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जांच के दौरान पता चला कि ये दोनों मोबाइल फोन कई वर्षों पहले खरीदे गए थे, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किए गए। हैरानी की बात यह है कि इन्हें पहली बार उसी अवधि में सक्रिय किया गया, जब पहलगाम आतंकी हमले की योजना बनाई जा रही थी और उसे अंजाम दिया गया था।
पाकिस्तान से जुड़ी खरीद और सप्लाई की जानकारी
जांच में सामने आया है कि रेडमी 9T फोन की खेप वर्ष 2021 में पाकिस्तान के कराची स्थित एक कंपनी द्वारा मंगवाई गई थी। वहीं दूसरा मोबाइल फोन वर्ष 2023 में लाहौर की एक संचार कंपनी द्वारा खरीदा गया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये मोबाइल फोन पाकिस्तान से आतंकियों तक कैसे पहुंचे और इनका इस्तेमाल हमले की योजना बनाने तथा संपर्क स्थापित करने में किस तरह किया गया। मोबाइल फोन की डिजिटल फोरेंसिक जांच भी की जा रही है, जिससे और महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
22 अप्रैल 2025 को हुआ था पहलगाम हमला
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में आतंकियों ने एक दर्दनाक हमला किया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति शामिल था, जिसने पर्यटकों की मदद करने की कोशिश की थी। हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। कई पीड़ित परिवार छुट्टियां मनाने आए थे, जबकि कुछ लोग हाल ही में शादी के बाद पहली बार घूमने निकले थे। इस हमले ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।
आतंकियों पर लगे गंभीर आरोप
जांच रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने लोगों की पहचान उनके धर्म के आधार पर करने की कोशिश की थी। बताया गया कि आतंकियों ने कुछ लोगों से धार्मिक सवाल पूछे और उसके बाद उन्हें निशाना बनाया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस हमले के पीछे संगठित आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था। हमले की जिम्मेदारी एक ऐसे संगठन ने ली थी, जिसे पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन से जुड़ा माना जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत हुई जवाबी कार्रवाई
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। इसी क्रम में मई 2025 में "ऑपरेशन सिंदूर" चलाया गया। इस अभियान के दौरान आतंकवादी ढांचे और उनसे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने इसे आतंकवाद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई बताया था।
जांच अभी जारी
फिलहाल NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। बरामद मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्क सूत्रों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हमले की पूरी साजिश को समझने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन नए सबूतों से आतंकियों के नेटवर्क और उनकी मदद करने वाले लोगों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। आने वाले समय में जांच से और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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