ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में हुई निक्की भाटी हत्या की घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश में सनसनी मचा दी थी। बुधवार को इस मामले में सास दया की जमानत याचिका को सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने इस मामले की गंभीर प्रवृत्ति को देखते हुए कहा कि आरोपी को रिहा करना उचित नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
21 अगस्त 2025 को विवाहित निक्की भाटी को उनके ससुराल पक्ष के लोगों ने जलाकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस ने इस घटना के बाद आरोपी पति विपिन भाटी, सास दया, जेठ रोहित और ससुर सत्यवीर के खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और जानलेवा चोट पहुंचाने का मामला दर्ज किया था। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी तीनों (सास दया, पति विपिन और ससुर सत्यवीर) अभी जेल में बंद हैं। वहीं, जेठ रोहित भाटी को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। हालांकि अन्य आरोपियों की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने कासना कोतवाली के माध्यम से अदालत में 500 पेज की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में बताया गया है कि आरोपी पक्ष ने आपस में षड्यंत्र रचकर निक्की भाटी की हत्या की।
चार्जशीट के अनुसार, निक्की और उसकी बहन इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाने के लिए उत्साहित थीं, जिससे ससुराल पक्ष नाराज हो गया। परिवार के विरोध के बावजूद अगर निक्की वीडियो बनाना नहीं मानती, तो ससुराल के लोग उसे मारपीट के बाद ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा देते हैं। इस घटना में निक्की की मृत्यु हो गई।
कोर्ट का रुख और सख्त फैसला
सत्र न्यायालय में बुधवार को हुई सुनवाई में निक्की भाटी पक्ष के वकील उधम सिंह तोंगड़ और संतोष बसंल ने कोर्ट को मामले की गंभीरता से अवगत कराया। न्यायाधीश ने आरोपी पक्ष की दलील खारिज करते हुए कहा कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और अभी आरोपी को जमानत देना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट में दिए गए सबूत और घटना की प्रकृति को देखते हुए जमानत इस समय पर मंजूर करना सामाजिक और कानूनी दृष्टि से अनुचित होगा।
परिवार की प्रतिक्रिया और समाज की उम्मीद
निक्की भाटी के परिवार ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में इस गंभीर अपराध के लिए उचित कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार और समाज इस घटना को सख्त चेतावनी मानते हैं कि दहेज और घरेलू प्रताड़ना जैसी घटनाओं को समाज में बढ़ने नहीं देना चाहिए।
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