ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा के सेक्टर 150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रतिक्रिया के बीच नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है और मामले की विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी गई है। यह कार्रवाई प्रशासन की जवाबदेही और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास में की गई है।
दुर्घटना कैसे हुई?
युवराज मेहता अपने घर लौट रहे थे जब धुंध भरे मौसम में उनकी कार अचानक निर्माणाधीन गड्ढे में गिर गई, जिसमें पानी भरा हुआ था। गड्ढा पर्याप्त सुरक्षा संकेत और रोशनी के बिना था। दुर्घटना के बाद युवराज लगभग 90 मिनट तक कार में फंसे रहे और उन्होंने मदद के लिए आवाज़ें भी लगाईं, लेकिन समय पर सहायता नहीं पहुँच पाई। इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
CEO लोकेश एम को हटाया, प्रतीक्षा में रखा गया
योगी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के CEO डॉ. लोकेश एम को तुरंत हटा दिया है। उन्हें किसी अन्य जिम्मेदारी पर नियुक्त नहीं किया गया और अब वे वेटिंग लिस्ट में रखे गए हैं। डॉ. लोकेश एक 2005‑बैच के यूपी कैडर के IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने जुलाई 2023 में नोएडा अथॉरिटी की कमान संभाली थी।
इसके अलावा, डॉ. लोकेश को नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) के पद से भी हटा दिया गया है। यह फैसला अभियंताओं और स्थानीय प्रशासन की कथित लापरवाही पर उठाए गए कदमों के हिस्से के रूप में लिया गया है।
SIT जांच गठित: 5 दिनों में रिपोर्ट
मुख्यमंत्री के निर्देश पर 3‑सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें मेरठ जोन के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG), मेरठ मंडलायुक्त और PWD के मुख्य इंजीनियर शामिल हैं। SIT को 5 दिनों के अंदर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। इस जांच में दुर्घटना के वास्तविक कारण, सुरक्षा मानकों की अनुपस्थिति और लापरवाही को शामिल किया जाएगा।
क्या बताया पुलिस ने?
पुलिस और घटनास्थल पर मौजूद बचाव टीमें जब मौके पर पहुँचीं, तब युवराज की कार आधी पानी में डूब चुकी थी। पुलिस, अग्निशमन दल, राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF/NDRF) की टीमें भी घटनास्थल पर थीं, लेकिन मोटा कोहरा और कठिन परिस्थितियों के कारण युवराज को बचाया नहीं जा सका।
स्थानीय लोगों ने भी जताई नाराज़गी
दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए और विरोध प्रदर्शन भी किए। आरोप है कि गड्ढे पर चेतावनी संकेत, रोशनी और सुरक्षा उपायों की कमी थी। यह मामला नोएडा प्रशासन की नागरिक सुरक्षा असमर्थता और निर्माण स्थलों पर न्यूनतम सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल उठा रहा है।
अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना
इस मामले को लेकर नोएडा अथॉरिटी ने पहले ही ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर को हटा दिया था और अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। अब SIT जांच की रिपोर्ट के आधार पर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
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