नोएडा इंजीनियर मौत केस: डेवलपर का बड़ा दावा — 2021 में प्राधिकरण के आदेश पर हटाए गए बैरिकेड
नोएडा के सेक्टर 150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। कोर्ट में डेवलपर ने दावा किया है कि 2021 में नोएडा अथॉरिटी के आदेश पर बैरिकेड हटाए गए थे, जिससे सुरक्षा घेरा कमजोर पड़ा था।
नोएडा इंजीनियर मौत केस: डेवलपर का बड़ा दावा — 2021 में प्राधिकरण के आदेश पर हटाए गए बैरिकेड
  • Category: नोएडा-ग्रेनो

नोएडा सेक्टर150 में software engineer युवराज मेहता (27) की 16‑17 जनवरी 2026 की रात एक पानी भरे गड्ढे में कार गिरने से मौत होने का मामला तीन सप्ताह से भी ज़्यादा समय से चर्चा में है। युवराज की कार एक बड़े गड्ढे में गिर गई थी, जहाँ पानी भरा हुआ था और उन्होंने करीब दो घंटे तक गहरी ठंड में खड़े रहने के बाद भी बचाव नहीं पाया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैलाया था।

 

अब इस मामले में कोर्ट में एक नया बयान आया है, जिसमें डेवलपर (प्लॉट मालिक) ने कहा है कि उस जगह पर पहले बैरिकेडिंग (सुरक्षा बैरियर) लगी थी, लेकिन जुलाई 2021 में नोएडा अथॉरिटी ने उस बैरिकेड को हटाने का आदेश दिया था। डेवलपर के वकील ने यह दावा सूरजपुर कोर्ट में किया।

 

डेवलपर का दावा: बैरिकेड हटने का आदेश मिला था

डेवलपर के पक्ष के अनुसार, वह प्लॉट सेक्टर150 पर पहले से बैरिकेडेड साइट रखता था ताकि जनता या गाड़ियों के गिरने का खतरा कम हो। लेकिन जुलाई 2021 में नोएडा अथॉरिटी ने उस बैरिकेड पर लगे विज्ञापन पर आपत्ति जताई और उसे हटाने को कहा। साथ ही कथित तौर पर डेवलपर पर 6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

 

उन्होंने कोर्ट में यह भी बताया कि उन्होंने मार्च 2022 में नोएडा अथॉरिटी को पत्र भेजा था जिसमें चेतावनी दी गई थी कि गड्ढे में पानी भर रहा है, सीवेज दरारें बनी हुई हैं और सड़क का हिस्सा धंस रहा है। उस खत में यह भी लिखा था कि ऐसे हालात गंभीर हादसे का जोखिम पैदा कर सकते हैं।

 

डेवलपर ने यह दावा भी किया कि बैरिकेड हटने के बाद सुरक्षा का माहौल कमज़ोर हो गया था। हालांकि नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि उन्होंने कभी भी सुरक्षा उपायों में ढील देने या बैरिकेड हटाने के लिए नहीं कहा; आदेश केवल अवैध विज्ञापन हटाने का था।

 

हादसे की रात का डरावना सच

16‑17 जनवरी की रात, युवराज मेहता की गाड़ी अचानक पानी भरे गड्ढे में गिर गई, जहाँ पानी और मलबा भरा था। स्थानीय लोगों और पिता ने बताया कि उन्होंने प्रशासन और डेवलपर दोनों को पहले से स्थिति के बारे में सूचना दी थी, किन्तु कार्रवाई समय से नहीं हुई।

 

हालांकि, पानी भरे गड्ढे का खतरा 2021 से ही सैटेलाइट इमेज में दिखाई दे रहा था, परन्तु सुरक्षा उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया था। इससे पहले इसी जगह एक ट्रक भी दुर्घटनाग्रस्त हो चुका था, जिसमें ड्राइवर बच गया था।

 

कोर्ट में सुनवाई और FIR

इस दर्दनाक घटना के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की है, जिसमें आरोप हैं — गलती से हत्या (Culpable homicide not amounting to murder) और लापरवाही से मौत होती हुई (causing death by negligence)। इसमें अब तक बिल्डर अभय कुमार (Wiztown Planners के निदेशक) और दो अन्य सहयोगियों को नामजद किया गया है।

 

कोर्ट में डेवलपर के वकील ने यह दावा पेश किया कि नोएडा अथॉरिटी के आदेशों के कारण बैरिकेड हटाना पड़ा था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के बारे में अथॉरिटी को पहले से जानकारी दी जा चुकी थी।

 

कोर्ट ने अब तक गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिका ठुकरा दी है और अदालत में उनका न्यायिक रिमांड बढ़ा दिया है। अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है।

 

प्राधिकरण की ओर से जवाब

नोएडा अथॉरिटी ने डेवलपर के दावों पर स्पष्ट किया है कि उनका आदेश सुरक्षा उपायों को कमजोर करने का नहीं था। उनका कहना है कि जिन बैरिकेड्स पर विज्ञापन लगे थे, उन्हें हटाने को कहा गया था, लेकिन यदि डेवलपर चाहता तो सादा बैरिकेड्स लगा सकता था ताकि सुरक्षा बनी रहे।

 

सिटी में सुरक्षा मानकों और सफाई से जुड़े नियम सभी सब‑लीज़ दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से लिखे हुए हैं, और इसका पालन जरूर होना चाहिए था। अथॉरिटी का कहना है कि सुरक्षा में कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए था।

 

स्थानीय जनता का गुस्सा और विरोध

युवराज की मौत के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैला है। इस दुर्घटना के बाद क्षेत्र के निवासियों ने प्रदर्शन भी किए और डेवलपर्स तथा अथॉरिटी दोनों पर लापरवाही के आरोप लगाए।

 

युवराज के पिता ने यह भी कहा है कि उन्होंने शुरुआती ही समय में प्राधिकरण को चेतावनी दी थी कि पानी जमा हो रहा है और सुरक्षा उपाय अपनाने की ज़रूरत है। यह शिकायत दो बार लिखित रूप में भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थितियों में सुधार नहीं हुआ।

 

प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुधार कदम

घटना के बाद नोएडा अथॉरिटी और यूपी सरकार ने veiligheids खतरों की पहचान की और शहर भर में 65 जोखिम‑भरे स्थलों की लिस्ट जारी कर दी है। इन सभी जगहों पर सुरक्षा उपायों को ठीक करने और चेतावनी संकेत लगाने को कहा गया है और समय‑सीमा भी तय की गई है ताकि इसी तरह के हादसे से पहले रोका जा सके।

 

प्राधिकरण ने कुछ आला अधिकारियों को हटाया है और सीईओ सहित जूनियर इंजीनियर सहित कुछ पदों से बदलाव किए हैं ताकि प्रशासन अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से निभा सके।

 

विशेष जांच दल (SIT) की भूमिका

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस युवराज मेहता मौत केस की जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) भी गठित की है, जो घटना की तह तक जा रही है। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल की बारीक जांच की और यह पता लगाने की कोशिश की कि तकनीकी लापरवाही के अलावा अन्य क्या कारण रहा।

 

यह टीम प्रशासनिक भूमिका, शिकायतों पर कार्रवाई की देरी और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार सज़ा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

 

क्या यह हादसा रोका जा सकता था?

विश्लेषण से यह साफ दिखता है कि यदि सुरक्षा उपायों, चेतावनी बैरिकेड और सतर्क निगरानी पहले से मजबूत थे, तो युवराज की मौत जैसे हादसे से बचा जा सकता था। स्थानीय शिकायतों पर समय से कार्रवाई न होने से राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।


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