ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ग्रेटर नोएडा में घर खरीदारों की उम्मीदों को नई दिशा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी समूह के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ की गिरफ्तारी के बाद अपनी जांच और तेज कर दी है। यह कार्रवाई उन हजारों खरीदारों के लिए बेहद अहम है, जो पिछले कई वर्षों से अपने सपनों के घर के इंतजार में भटक रहे हैं।
फंड डायवर्जन की रकम पहुंची 15,000 करोड़ के करीब
ईडी अब उस रकम की गहराई से जांच कर रही है, जो घर खरीदारों ने जेपी की विभिन्न परियोजनाओं में जमा की थी। माना जा रहा है कि करीब 14,599 करोड़ रुपये, जिसे परियोजनाओं में इस्तेमाल होना था, उसे दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। शुरुआती जांच 12,000 करोड़ से शुरू हुई थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 15,000 करोड़ के आसपास पहुंचता दिख रहा है।
जांच में बड़ा खुलासा: पैसों का रुख बदल दिया गया
जांच में सामने आया है कि खरीदारों की मोटी रकम को आवासीय परियोजनाओं में लगाने के बजाय जेपी समूह ने अपनी अन्य कंपनियों की ओर मोड़ दिया। इसमें शामिल हैं—
◘ हेल्थकेयर
◘ स्पोर्ट्स कंपनियां
◘ ट्रस्ट से जुड़े उपक्रम
ईडी ने इस मामले में मई 2024 में जांच शुरू की थी। इसी दौरान टीमों ने 23 मई को सेक्टर-128 स्थित जेपी के कॉरपोरेट और मार्केटिंग ऑफिस सहित करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
मनोज गौड़ और संबंधित कंपनियों पर विशेष नजर
छापेमारी के दौरान ईडी ने—
◘ मनोज गौड़ का आवास
◘ गुलशन बिल्डर्स का दफ्तर
◘ जेपी परियोजनाएं पूरी करने वाली ‘सुरक्षा ग्रुप’ के दफ्तर सहित कई ठिकानों पर तलाशी ली।
यह कार्रवाई घर खरीदारों और निवेशकों के 12,000 करोड़ रुपए के कथित फंड डायवर्जन की शिकायतों के आधार पर शुरू हुई थी। दिल्ली और यूपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज केस और लगातार चल रहे घर खरीदारों के विरोध ने भी इस जांच को मजबूती दी।
20 हजार निवेशक और 150 अधूरे टावर
नोएडा स्थित जेपी विशटाउन की 16 अधूरी परियोजनाएं, करीब 20,000 निवेशकों से जुड़ी हैं। इनमें लगभग 150 टावर शामिल हैं, जिनमें से कई सालों से अधूरे पड़े हैं। घर खरीदार लगातार बनी अनिश्चितता और वादाखिलाफी से परेशान हैं।
परियोजना में पड़ी 24 लाख वर्गफुट जमीन भी जांच के दायरे में
अप्रैल में जेपी और सुरक्षा समूह की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया था कि परियोजना क्षेत्र में 24 लाख वर्गफुट जमीन खाली पड़ी है, जिसे बेचकर निर्माण कार्य तेज किया जा सकता है।
साथ ही बताया गया था कि:
◘ निर्माण पूरा करने के लिए 2,900 करोड़ रुपये की जरूरत होगी
◘ भविष्य में निवेशकों से 1,200 करोड़ मिलने की उम्मीद है
◘ सुरक्षा समूह को 25 लाख वर्गफुट में बने 1,100 रेडी-टू-सेल फ्लैट बेचने का अधिकार भी दिया गया था
अब यह सभी पहलू ईडी की जांच का हिस्सा हैं।
जांच की दिशा अन्य बिल्डर्स तक भी जाएगी
ईडी अब जेपी समूह से जुड़े उन अन्य बिल्डर्स और कारोबारी समूहों तक भी पहुंचने की तैयारी में है, जिनके साथ पिछले वर्षों में बड़ा वित्तीय लेनदेन हुआ है।
एजेंसी यह पता लगा रही है कि—
◘ इन लेनदेन का असल उद्देश्य क्या था?
◘ क्या इससे घर खरीदारों के हित प्रभावित हुए?
खरीदारों की वर्षों पुरानी उम्मीदें फिर जगीं
ईडी की सक्रियता से घर खरीदारों को उम्मीद जगी है कि फंड डायवर्जन का बड़ा जाल जल्द उजागर होगा और शायद उनके सपनों का घर वास्तविकता के करीब आएगा। अब नजर ईडी की आने वाली कार्रवाई और वित्तीय प्रवाह के वास्तविक खुलासे पर है।
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