ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
नोएडा-ग्रेटर नोएडा इलाके में जनवरी की रातें वैसे ही मुश्किल होती हैं—ठंड, नमी और घना कोहरा। इसी कोहरे भरी रात सेक्टर-150 के पास एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार एक पानी से भरे गहरे गड्ढे/निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी और कुछ घंटों के भीतर यह खबर “लापरवाही” और “रेस्क्यू में देरी” की बहस बन गई।
युवराज कौन थे और उस रात क्या हुआ?
युवराज मेहता सेक्टर-150 में टाटा यूरेका पार्क सोसायटी के निवासी बताए गए हैं और गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह देर रात ऑफिस से घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे में उनकी गाड़ी नियंत्रण खो बैठी और सड़क किनारे मौजूद गहरे, पानी से भरे हिस्से में चली गई। बताया गया कि मौके पर विजिबिलिटी बहुत कम थी और सड़क के पास सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठे।
“पापा… मैं अभी मरना नहीं चाहता” — आखिरी कॉल की कहानी
इस मामले में सबसे ज्यादा दर्दनाक बात वह कॉल बताई जा रही है, जो युवराज ने अपने पिता को की थी। अलग-अलग रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि वह मदद के लिए अपने पिता और परिचितों को फोन कर रहे थे और किसी तरह बचाने की गुहार लगा रहे थे। परिवार का आरोप है कि अगर समय पर सही तरीके से रेस्क्यू होता तो जान बच सकती थी।
रेस्क्यू पर सवाल: मदद क्यों देर से मिली?
घटना के बाद बचाव कार्य पर कई सवाल उठे। रिपोर्ट्स में कहा गया कि स्थानीय लोगों और परिवार ने तैनात टीमों पर देरी और तैयारियों की कमी जैसे आरोप लगाए। वहीं प्रशासनिक पक्ष में यह बात सामने आई कि जांच चल रही है और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सुरक्षा इंतजामों पर बड़ा विवाद: बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत
परिवार और स्थानीय लोगों का मुख्य आरोप यह है कि हादसे वाली जगह पर बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड जैसी चीजें पर्याप्त नहीं थीं। घने कोहरे में अगर सड़क के किनारे ऐसा गहरा गड्ढा/बेसमेंट खुला पड़ा हो, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है—यही बात लोगों ने सबसे ज्यादा उठाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी आधार पर बिल्डरों/डेवलपर्स की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए।
FIR किस पर हुई और धार क्या बनी?
इस केस में युवराज के पिता की शिकायत के आधार पर दो रियल एस्टेट फर्मों/बिल्डरों के खिलाफ FIR दर्ज होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केस नॉलेज पार्क थाने में दर्ज हुआ और परिवार ने इसमें लापरवाही व सुरक्षा इंतजाम न होने का आरोप लगाया। आगे की जांच में पुलिस और संबंधित एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
अथॉरिटी की कार्रवाई: JE की सेवा समाप्त
हादसे के बाद कार्रवाई के तौर पर ट्रैफिक से जुड़े काम देखने वाले नोएडा अथॉरिटी के जूनियर इंजीनियर (JE) नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने की सूचना सामने आई। साथ ही, संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस और बिल्डर से जुड़े आवंटन/निर्माण कार्य की रिपोर्ट मांगे जाने की बात भी कही गई। यानी अब यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं रहा, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का मुद्दा बन गया।
लोगों का गुस्सा: “यह हादसा टल सकता था”
हादसे के बाद इलाके में नाराज़गी दिखी और कई लोगों ने इसे “रोकने लायक” त्रासदी बताया। स्थानीय निवासियों की शिकायतें, सुरक्षा इंतजाम और पहले से खतरे की आशंका जैसी बातें भी चर्चा में रहीं। यही वजह है कि यह मामला अब सड़क सुरक्षा, निर्माण स्थलों की निगरानी और रात के वक्त ट्रैफिक सेफ्टी जैसे बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
अब आगे क्या?
अब सबकी नजर जांच और जिम्मेदारी तय होने पर है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और लोग चाहते हैं कि इस तरह के गड्ढे/निर्माण स्थल को सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम हों। इस पूरे मामले ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में “सेफ्टी पहले” की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है
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