ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक विकास को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हाल ही में इन्वेस्ट यूपी की रिपोर्ट के आधार पर नोएडा अथॉरिटी ने अपने औद्योगिक प्लॉट्स की जांच कराई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिले में 400 से अधिक औद्योगिक प्लॉट्स पर काम शुरू नहीं हुआ है।
नोएडा अथॉरिटी की जांच में 63 नॉन-फंक्शनल प्लॉट्स
नोएडा अथॉरिटी की जांच में कुल 63 ऐसे प्लॉट्स पाए गए, जिन पर अभी तक कोई निर्माण या औद्योगिक गतिविधि नहीं हुई। इन प्लॉट्स में अधिकांश का आवंटन यूपी इन्वेस्टर समिट के दौरान किए गए एमओयू के आधार पर हुआ था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ निवेशकों ने केवल जमीन हासिल करने के लिए एमओयू किया था, वास्तविक उद्योग लगाने का इरादा नहीं था।
नोएडा अथॉरिटी ने पहले भी ऐसे निवेशकों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन कई ने समय पर काम शुरू नहीं किया। अब अथॉरिटी प्लॉट निरस्तीकरण, जुर्माना और पुनः आवंटन जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
ग्रेटर नोएडा में 13 प्लॉट्स का आवंटन निरस्त
जांच में यह भी पता चला कि ग्रेटर नोएडा में 13 औद्योगिक प्लॉट्स के आवंटन को निरस्त कर दिया गया है। इन आवंटियों ने प्लॉट मिलने के बाद किसी भी औद्योगिक गतिविधि या निर्माण का काम नहीं किया। इनमें कई ऐसे आवंटी शामिल हैं, जिन्हें प्लॉट 2008 में आवंटित किए गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्लॉटों पर काम नहीं करने वाले निवेशकों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन बावजूद इसके कोई प्रगति नहीं हुई। एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि इन आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और उनकी प्लॉट को भविष्य में दूसरे निवेशकों को आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है।
एमओयू आधारित आवंटन में जल्दबाजी
जांच से यह भी सामने आया कि कई प्लॉटों का आवंटन जल्दबाजी में किए गए एमओयू के आधार पर हुआ था। निवेशकों ने केवल दस्तावेज पूरा करने के उद्देश्य से एमओयू साइन किए, जबकि वास्तविक उद्योग लगाने का इरादा नहीं था। इससे औद्योगिक विकास की गति पर असर पड़ा और कई प्लॉट वर्षों तक खाली पड़े रहे।
औद्योगिक क्षेत्र में सुधार की दिशा
नोएडा अथॉरिटी अब यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि भविष्य में प्लॉट केवल उन्हीं निवेशकों को आवंटित किए जाएं, जो वास्तविक उद्योग लगाना चाहते हैं। इसके लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और समय-सीमा निर्धारित करने जैसे उपायों पर भी काम किया जा रहा है।
लोकेश एम, सीईओ नोएडा अथॉरिटी, ने कहा कि कुछ नॉन-फंक्शनल प्लॉट्स के लिए अभी भी समय बचा है, लेकिन जिन पर वर्षों तक काम नहीं हुआ, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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