ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल, सीटों के अनुमान और गठबंधनों की चर्चा अपनी जगह है, लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी महिला मतदाताओं की रिकॉर्ड भागीदारी बनकर उभरी है.
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में कई जगह महिलाओं ने मतदान प्रतिशत में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या सत्ता की चाबी इस बार महिला वोटरों के हाथ में है.
यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है. चुनावी राजनीति को करीब से देखने वाले लोग मानते हैं कि जब किसी राज्य में महिला मतदान लगातार पुरुषों से ज्यादा रहने लगे, तो उसका असर सीधे नतीजों पर पड़ता है.
इसी वजह से इस बार महिला भागीदारी को चुनाव का निर्णायक संकेत माना
जा रहा है.
किन राज्यों में क्या तस्वीर रही
पश्चिम
बंगाल में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और दोनों चरणों में महिलाओं की भागीदारी
पुरुषों से अधिक रही. दूसरे चरण में महिला मतदान 92.28 प्रतिशत
और पुरुष मतदान 91.07 प्रतिशत बताया गया.
पहले चरण में भी महिलाओं की भागीदारी 92.69 प्रतिशत
रही, जबकि पुरुषों का आंकड़ा 90.92 प्रतिशत
था. इतने बड़े वोटर बेस वाले राज्य में यह अंतर छोटा नहीं माना जा रहा.
असम में कुल 85.91 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जा रहा है. यहां महिला मतदान 86.50 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 85.33 दर्ज किया गया.
तमिलनाडु में भी महिलाओं ने बढ़त बनाई, जहां 85.76
प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाला और पुरुषों का आंकड़ा 83.57 प्रतिशत रहा.
केरल में कुल औसत मतदान 78.23 प्रतिशत रहा, लेकिन यहां भी महिला वोटरों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का मतदान 80.86 प्रतिशत और पुरुषों का 75.01 प्रतिशत रहा.
पुडुचेरी में भी करीब 90 प्रतिशत मतदान दर्ज
हुआ, जिसने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया.
नतीजों पर क्या असर पड़ सकता है
महिला
मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी का सीधा मतलब है कि अब राजनीतिक दलों को महिलाओं से
जुड़े मुद्दों पर ज्यादा साफ और ठोस रुख लेना होगा.
चाहे वह महंगाई हो, सुरक्षा, कल्याण योजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य
या स्थानीय सुविधाएं, महिला वोट अब सिर्फ समर्थन का प्रतीक
नहीं रहा, बल्कि सत्ता बदलने वाला कारक बन सकता है.
रिपोर्ट
में यह भी कहा गया है कि एग्जिट पोल अपनी-अपनी तस्वीर दिखा रहे हैं, लेकिन असली निर्णायक तत्व
महिला भागीदारी बन सकती है.
यह चुनाव इस बात का संकेत भी देता है कि भारत की लोकतांत्रिक
राजनीति में महिला मतदाता अब केंद्र में आ चुकी हैं.
रिपोर्ट
के मुताबिक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी,
केरल और असम के नतीजे 4 मई को घोषित किए
जाएंगे.
तब यह साफ होगा कि रिकॉर्ड महिला वोटिंग ने सिर्फ चर्चा ही नहीं,
बल्कि सत्ता के समीकरण भी बदले या नहीं.
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