ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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टीवी9 भारतवर्ष के खास कार्यक्रम ‘सत्ता सम्मेलन बिहार’ में बिहार की सियासत के बड़े चेहरे एक मंच पर नजर आए. पटना में आयोजित इस सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर जैसे सियासी दिग्गजों ने अपनी-अपनी राय रखी और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार किया।
कार्यक्रम की शुरुआत उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हुई, जिन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नीतीश कुमार ही बिहार के ‘फर्स्ट एंड लास्ट’ नेता हैं और आगे भी राज्य का नेतृत्व वही करेंगे।
उन्होंने कहा, "20 सालों में बिहार को नीतीश कुमार ने बदलकर रख दिया है। अब ये कहना गलत होगा कि बिहार बदलेगा, बिहार पहले ही बदल चुका है।"
सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी हमेशा से किंगमेकर रही है, चाहे बात लालू यादव की पहली सरकार की हो या नीतीश कुमार के शुरुआती दौर की।
उन्होंने बताया, "जब नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब बीजेपी के 69 विधायक थे और समता पार्टी के 32। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने दूरदृष्टि दिखाई और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाकर भेजा।"
नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता और विकास मॉडल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कभी नीतीश के साथ सत्ता की भूख के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए साथ दिया। यही कारण है कि आज भी नीतीश कुमार को पार्टी का पूरा समर्थन है।
बात सिर्फ विकास की नहीं रही, कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने बांग्लादेशियों के वोटर बनने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि संविधान साफ कहता है कि भारत का नागरिक ही भारत का मतदाता हो सकता है, लेकिन कुछ लोग किताब लेकर घूम रहे हैं और नियमों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने खुलासा किया कि पुर्णिया कमिश्नरी के चार जिलों में 120% से अधिक आधार कार्ड रजिस्टर्ड हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। "जितने लोग रहते हैं, उससे ज़्यादा आधार कार्ड बने हैं, ये किसकी साजिश है?" उन्होंने सवाल उठाया।
कार्यक्रम में कई सत्रों के ज़रिए बिहार की राजनीति के मौजूदा हालात, जनभावनाएं, और आने वाले चुनावों के समीकरणों पर चर्चा हुई।
तेजस्वी यादव ने जहां सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए, वहीं प्रशांत किशोर ने जन सरोकार और युवाओं की भूमिका पर अपना दृष्टिकोण रखा।
‘सत्ता सम्मेलन बिहार’ ने ना सिर्फ सत्ता के दावेदारों को मंच दिया, बल्कि जनता की उन बातों को भी जगह दी जो 2025 के विधानसभा चुनावों में बड़ा असर डाल सकती हैं।
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