ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई की कथित हत्या के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर भारत में भी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के स्कॉलर रेहान अख्तर कासमी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे वैश्विक शांति के लिए खतरनाक बताया है।
ओवैसी ने बताया कायरतापूर्ण हमला
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अयातोल्लाह खामेनेई की हत्या को कायरतापूर्ण और अमानवीय करार दिया। उन्होंने कहा कि जब जेनेवा में शांति वार्ता चल रही थी, उसी दौरान हमला किया जाना यह दिखाता है कि बातचीत की प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की गई।
ओवैसी ने कहा, “ईरान के सम्मानित नेता को मार दिया गया। ईरान के लोग इसका जवाब जरूर देंगे। यह हमला ऐसे समय हुआ जब कूटनीतिक प्रयास जारी थे, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
ओवैसी ने विशेष रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, और तेल के दाम में मामूली बढ़ोतरी भी आम लोगों की जेब पर भारी पड़ती है।
उन्होंने कहा, “अगर एक डॉलर का भी फर्क पड़ता है, तो उसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा होता है।” महंगाई, परिवहन खर्च और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
रेहान अख्तर कासमी की शांति की अपील
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के स्कॉलर रेहान अख्तर कासमी ने भी इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। कासमी ने कहा, “दोनों देशों में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। आर्थिक केंद्रों पर हमलों से अफरा-तफरी का माहौल है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अफगानिस्तान का संघर्ष, इतिहास गवाह है कि युद्ध से स्थायी समाधान नहीं निकलता।”
उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की वकालत करे और तनाव कम करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाए।
इजरायल का ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’
इजरायल की सेना IDF ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक पोस्ट में इजरायली वायुसेना ने दावा किया कि उसने तेहरान के प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खामेनेई और ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दोलरहीम मूसवी के मारे जाने की खबर है।
इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर और सऊदी अरब में मौजूद ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
वैश्विक शांति पर बड़ा सवाल
यह घटनाक्रम केवल दो देशों के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र रहा है, और यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया पर होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात काबू में नहीं आए, तो यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियों की भूमिका अहम हो जाती है
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