RG कर केस की पीड़िता की मां बनीं BJP उम्मीदवार: बंगाल चुनाव में महिला सुरक्षा पर सियासत तेज
पश्चिम बंगाल में RG कर केस की पीड़िता की मां को बीजेपी ने चुनाव मैदान में उतारा। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने।
RG कर केस की पीड़िता की मां बनीं BJP उम्मीदवार: बंगाल चुनाव में महिला सुरक्षा पर सियासत तेज
  • Category: राजनीति

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा और भावनात्मक मोड़ देखने को मिल रहा है। चर्चित RG कर अस्पताल दुष्कर्म और हत्याकांड की पीड़ित महिला डॉक्टर की मां को बीजेपी ने चुनावी मैदान में उतारा है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दे दी है, जहां अब महिला सुरक्षा का मुद्दा और ज्यादा केंद्र में आ गया है। नॉर्थ 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट से रत्ना देबनाथ को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। यह वही मामला है जिसने दो साल पहले पूरे राज्य में भारी आक्रोश पैदा किया था।

 

आम महिला से उम्मीदवार तक का सफर

रत्ना देबनाथ का राजनीति से पहले कोई संबंध नहीं रहा है। वह एक सामान्य महिला हैं, लेकिन अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई ने उन्हें एक नई पहचान दी। उन्होंने खुद बीजेपी को पत्र लिखकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और अब वह चुनावी मैदान में हैं।

 

रत्ना का कहना है कि उन्हें 200 प्रतिशत विश्वास है कि वह चुनाव जीतेंगी। उनके मुताबिक, यह सिर्फ उनकी जीत नहीं होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र और राज्य के लोगों की जीत होगी।

 

स्मृति ईरानी ने कराया नामांकन

रत्ना देबनाथ के नामांकन को खास बनाने के लिए बीजेपी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी खुद मौजूद रहीं। 9 अप्रैल को उन्होंने रत्ना का नामांकन दाखिल कराया। इस कदम को बीजेपी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी महिला वोटरों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

 

महिला सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा

रत्ना देबनाथ ने साफ कहा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अब वह दूसरी बेटियों की सुरक्षा के लिए लड़ेंगी। बीजेपी इस मुद्दे को लेकर टीएमसी सरकार पर लगातार हमलावर है। पार्टी का आरोप है कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल हैं। वहीं, स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है, जिससे चुनाव और दिलचस्प हो गया है।

 

पानीहाटी सीट पर कड़ा मुकाबला

पानीहाटी विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। यहां टीएमसी के वरिष्ठ नेता निर्मल घोष लंबे समय से जीतते आ रहे हैं। उन्होंने कई बार इस सीट पर जीत हासिल की है। इस बार टीएमसी ने उनके बेटे तीर्थंकर घोष को मैदान में उतारा है, जो अपना पहला चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में यह मुकाबला अनुभव बनाम भावनात्मक मुद्दों के बीच देखने को मिल सकता है।

 

राजनीतिक असर और संभावनाएं

इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव सिर्फ विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा और न्याय जैसे संवेदनशील विषयों पर भी लड़ा जाएगा। रत्ना देबनाथ की उम्मीदवारी ने इस चुनाव को और ज्यादा भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।

 

RG कर केस की पीड़िता की मां का चुनावी मैदान में उतरना सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक संदेश भी है। यह संदेश है न्याय, सुरक्षा और बदलाव की उम्मीद का। अब देखना होगा कि जनता इस भावनात्मक अपील को कितना समर्थन देती है और इसका चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ता है।

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