ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
भारत का केंद्रीय बजट 2026‑27 1 फरवरी को संसद में पेश किया गया। हर साल की तरह इस बजट पर सरकार और विपक्ष लगातार बहस करते हैं, लेकिन इस बार विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) ने खासकर बजट पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि यह बजट दिल्ली, युवाओं और खासकर बेरोजगारी की समस्या को नजरअंदाज करता है।
केजरीवाल ने बजट को बताया “निराशाजनक”
अरविंद केजरीवाल ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज देश की सबसे बड़ी समस्याएं बेरोजगारी और महंगाई हैं, लेकिन इस बजट में इन मुद्दों को हल करने का कोई ठोस योजना या ब्लूप्रिंट नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि बजट केवल महंगाई और बेरोजगारी दोनों को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है क्योंकि आज युवाओं को रोजगार की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन कोई ठोस उपाय बजट में नहीं है।
उनका यह भी कहना रहा कि बजट में रोज़गार सृजन नीति के सवाल पर कोई स्पष्ट रोडमैप या रणनीति नहीं है, जिससे आने वाले वर्षों में नौजवानों को रोजगार के अवसर कम होंगे। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के बजट से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना और कठिन होगा।
मोदी सरकार पर निशाना
बजट पर अपने बयान में केजरीवाल ने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि बजट में गोवा के लिए कोई भी उल्लेख या ठोस योजनाएं नहीं हैं, जिससे लगता है कि केंद्र सरकार ने उस राज्य की अनदेखी की है। उनके अनुसार, एक राष्ट्रीय बजट में देश के अलग‑अलग हिस्सों के बारे में सोचना जरूरी होता है, लेकिन इस बार इसे नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की बड़ी समस्याओं को इस बजट ने सही मायने में नहीं समझा, बल्कि यह अधिकतर महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को बढ़ावा देगा। उनके अनुसार इस बजट ने आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से कोई ठोस हल नहीं पेश किया है।
AAP नेताओं का पूरा रुख
एक तरफ अरविंद केजरीवाल ने सरकार को केंद्र में बनाए रखा है, वहीं AAP के वरिष्ठ नेताओं ने भी कई सवाल उठाए हैं। पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय बजट का सही उपयोग तब होगा जब सरकार बेरोजगारों को नौकरी देने की प्रतिबद्धता दिखाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने पहले किए गए वादों, जैसे हर साल 2 करोड़ नौकरियों का निर्माण करने का क्या परिणाम निकला?
इसके अलावा AAP मीडिया प्रभारी द्वारा यह भी कहा गया है कि बजट में पंजाब जैसे राज्यों की परवाह नहीं की गई है, और वह पिछड़े राज्यों को अनदेखा करता है। बजट में पंजाब का उल्लेख न होना इस आरोप का मुख्य कारण है।
महंगाई और बेरोजगारी पर चिंता
केजरीवाल का मुख्य तर्क यह है कि आज देश में महंगाई दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है। महंगाई बढ़ने से जीवनयापन मुश्किल हो जाता है, और लेटेस्ट बजट में उन उपायों का जिक्र नहीं है जो महंगाई को नियंत्रित कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं और आम परिवारों के लिए बेरोजगारी आज की सबसे बड़ी समस्या है, जो इस बजट में अनदेखी की गई है। उनका निष्कर्ष है कि बजट केवल आकड़ों और घोषणाओं तक सीमित है, लेकिन जनता के जीवन में स्पष्ट बदलाव नहीं दिख रहा है।
विपक्ष में और भी प्रतिक्रियाएं
AAP के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी बजट पर आलोचना की है। कई राज्यों के नेताओं ने कहा कि बजट ने गरीब, किसानों और छोटे व्यवसायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। बसपा प्रमुख मायावती और अन्य विपक्षी नेता भी इस बात पर सहमत हैं कि बजट नाम बड़े दर्शन छोटे जैसा है, यानी बड़े दावे के बावजूद जनता को प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार की प्रतिक्रिया और बजट की व्याख्या
वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार का दावा है कि बजट सबके लिए कुछ न कुछ प्रदान करता है और यह भारत को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है। वित्त मंत्री ने कई सेक्टर्स में बजट का लाभ बताया है, जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और निवेश। इसके अनुसार, बजट देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक विकास की दिशा में ले जाएगा।
सरकार के समर्थक यह भी कहते हैं कि बजट में दिए गए कई संकेत अगले कुछ वर्षों में रोजगार पैदा करने में सहायता कर सकते हैं, जैसे निवेश में वृद्धि और तकनीकी उद्योगों का विस्तार। हालांकि इसे भी व्यापक जनमानस में लागू होने के लिए समय मिलेगा।
जनता की प्रतिक्रिया
बजट पर जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ लोगों का कहना है कि बजट में लंबी अवधि के सुधार के संकेत हैं, लेकिन तुरंत राहत नहीं दी गई। वहीं कुछ युवा वर्ग और बेरोजगारों को अब भी यह महसूस हो रहा है कि बजट ने उनकी चिंता को नहीं समझा, खासकर रोजगार और महंगाई के मुद्दों पर।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बजट सामान्य आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर बनाया गया है, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों के लिए अधिक विशिष्ट नीतियों की आवश्यकता होती है, जिसे आगे के चरणों में रखा जाना चाहिए।
क्या बजट ठीक‑ठाक है या फिर आलोचना जायज?
जहां सरकार का यह दावा है कि बजट भविष्य का आधार है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि बजट किसानों, युवाओं और आम आदमी की समस्याओं को हल नहीं करता। यह बहस केवल सियासी विवाद नहीं है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक नीति के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
केजरीवाल का तर्क है कि यदि बेरोजगारी और महंगाई की समस्या हल नहीं होती, तो आर्थिक विकास के दिये गए लक्ष्यों का लाभ जनता के जीवन तक नहीं पहुंचेगा। इसके लिए नीति निर्माताओं को और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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