ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली में एक 10 साल की बच्ची के साथ अपहरण और यौन अपराध का मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। पुलिस ने इस मामले में 25 साल के ई-रिक्शा चालक दुर्गेश को गिरफ्तार किया है। आरोपी के उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद का रहने वाला होने की बात बताई गई है। पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।
ऐसी घटनाएं सिर्फ एक परिवार की जिंदगी नहीं बदलतीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती हैं। इस रिपोर्ट में वही बातें रखी जा रही हैं जो पुलिस जांच और सामने आए तथ्यों में बताई गई हैं। पीड़िता की पहचान और निजी जानकारी का ध्यान रखते हुए यहां सिर्फ जरूरी जानकारी ही साझा की जा रही है।
घटना क्या है?
पुलिस के मुताबिक यह घटना 10 जनवरी की बताई गई है। बच्ची ट्रैफिक सिग्नल पर गुलाब बेच रही थी। इसी दौरान आरोपी ने यात्रियों को उतारने के बाद अपना ई-रिक्शा रोका। जब बच्ची फूल बेचने उसके पास पहुंची, तो आरोपी ने सारे गुलाब बिकवा देने का झांसा देकर उसे ई-रिक्शा में बैठा लिया। इसके बाद आरोपी बच्ची को एक सुनसान इलाके की ओर ले गया, जहां उसके साथ यौन अपराध किया गया।
यहां एक बात साफ है—भीड़-भाड़ वाली जगह पर काम करने वाले बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन जाती है। ट्रैफिक सिग्नल, बस स्टैंड, मार्केट जैसे पॉइंट्स पर बच्चे अक्सर अकेले भी दिख जाते हैं, और यही चीज अपराधियों के लिए मौका बनती है।
परिवार तक मामला कैसे पहुंचा?
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद आरोपी बच्ची को गंभीर हालत में छोड़कर फरार हो गया। कुछ समय बाद होश में आने पर बच्ची किसी तरह अपने परिवार तक पहुंची। परिवार ने उसकी हालत देखकर उसे अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के अनुसार बच्ची का इलाज और परामर्श (काउंसलिंग) जारी है।
किसी भी ऐसे केस में पीड़ित परिवार के लिए सबसे मुश्किल समय शुरुआती घंटे होते हैं। डर, गुस्सा और चिंता के बीच सही कदम उठाना आसान नहीं होता, लेकिन तुरंत इलाज और पुलिस को सूचना देना बहुत जरूरी होता है।
पुलिस जांच: CCTV से आरोपी तक
पुलिस के मुताबिक इस केस की जांच में कई चुनौतियां थीं, क्योंकि बच्ची गहरे सदमे में थी। पुलिस ने बच्ची को आखिरी बार देखे गए इलाके और सुनसान इलाके की ओर जाने वाले रास्तों के करीब 15 मार्गों पर लगे लगभग 300 CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की। एक वीडियो क्लिप में बच्ची को ई-रिक्शा में बैठते हुए देखा गया। इसके बाद वाहन के पंजीकरण नंबर का पता लगाया गया। इसी नंबर के आधार पर आरोपी की पहचान हुई और उसे गिरफ्तार किया गया।
यह पूरा हिस्सा दिखाता है कि CCTV और रूट-ट्रैकिंग आज की पुलिसिंग में कितनी अहम हो गई है। लेकिन साथ ही यह भी सच है कि सिर्फ कैमरे होना काफी नहीं, उनका सही तरीके से काम करना और समय पर जांच होना भी उतना ही जरूरी है।
“चप्पल” से मिला अहम सुराग
डीसीपी के मुताबिक 11 जनवरी 2026 को अस्पताल से सूचना मिली कि एक 10 साल की बच्ची के साथ गलत काम हुआ है। बच्ची ने यह भी बताया कि 10 जनवरी की दोपहर बीएल कपूर अस्पताल के पास एक अज्ञात ई-रिक्शा ड्राइवर ने उसे लालच दिया था। केस दर्ज होने के बाद प्रसाद नगर थाना प्रभारी के साथ पुलिस टीम ने करीब 20 वर्ग किलोमीटर का इलाका छान मारा और 22 अलग-अलग जगहों की तलाशी ली।
रामनाथ विजय मार्ग के पास पुलिस को बच्ची की चप्पल मिली, जिससे घटनास्थल की पहचान में मदद मिली। इसके बाद CCTV फुटेज खंगालते हुए पुलिस संदिग्ध ई-रिक्शा तक पहुंची। कई बार छोटे-से सबूत केस की दिशा बदल देते हैं। इसीलिए मौके से जुड़ी हर चीज—कपड़े, सामान, आसपास की फुटेज—सब कुछ जांच में बहुत मायने रखता है।
आरोपी से पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने बच्ची को पहले भी कई बार लाल बत्ती पर देखा था और अपहरण की योजना बनाई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपी की निशानदेही पर खून से सने कपड़े और अन्य सबूत बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच आगे भी जारी है।
जांच चल रही हो तो कई चीजें बाद में और साफ होती हैं—जैसे आरोपी की पूरी टाइमलाइन, उसकी पहले की गतिविधियां, और क्या किसी और की भूमिका तो नहीं। इसी वजह से पुलिस की प्रक्रिया और कोर्ट की कार्रवाई पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होता।
ऐसे मामलों में समाज क्या कर सकता है?
इस घटना से एक बात फिर साफ होती है कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ पुलिस का काम नहीं, पूरे सिस्टम और समाज की जिम्मेदारी है। ट्रैफिक सिग्नल, मार्केट और सार्वजनिक जगहों पर काम करने वाले बच्चों के लिए सुरक्षा, निगरानी और मदद की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। परिवार और आसपास के लोगों को भी बच्चों को “सुरक्षित दूरी” और “अनजान व्यक्ति के साथ न जाने” जैसी बातें बार-बार समझानी पड़ती हैं।
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