ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जिसे आमतौर पर JNU कहा जाता है, एक बार फिर खबरों में है। इस बार मामला है केंद्रीय पुस्तकालय में तोड़फोड़ का, जिसके आरोप में 5 पीएचडी छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में लिया गया है और छात्रों के राजनीतिक और छात्र संगठनों में हलचल मचा दी है।
क्या हुआ था घटना के दिन?
21 नवंबर 2025 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय के बाहर लगे एफआरटी (Facial Recognition Technology) आधारित मशीनों में तोड़फोड़ की गई थी। विश्वविद्यालय की जांच में पाया गया कि इन मशीनों को तोड़कर कैमरा और उसके उपकरण को नुकसान पहुँचाया गया, जिससे पुस्तकालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। जांच में यह भी सामने आया कि यह कार्रवाई सुरक्षा कर्मियों की आग्रह और चेतावनी के बावजूद की गई थी, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।
एफआरटी तकनीक वास्तव में चेहरे की पहचान के माध्यम से पुस्तकालय के प्रवेश को नियंत्रित करती है और छात्रों तथा कर्मियों की सुरक्षा का हिस्सा है। ऐसे में इस तकनीक को नुकसान पहुंचाना सिर्फ संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसा नहीं माना गया, बल्कि यह अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था के खिलाफ गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा गया।
कौन हैं निलंबित छात्र?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिन 5 छात्रों को निलंबित किया है उनमें से अधिकांश जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के पदाधिकारी हैं। इन छात्रों के नाम हैं:
इन सभी छात्रों को तत्काल प्रभाव से पूरे JNU परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है और उन्हें आगामी विंटर और मानसून सेमेस्टर 2026 के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
निलंबन और जुर्माने की सजा
केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि इन सभी छात्रों पर ₹20,000 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह जुर्माना इसलिए लगाया गया है क्योंकि एफआरटी उपकरणों को नुकसान पहुँचाने में विश्वविद्यालय को आर्थिक हानि हुई है – इन तकनीकी मशीनों का अनुमानित खर्च लगभग ₹20 लाख बताया गया है।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति सख्ती बरतेगा, चाहे वह छात्र संघ का पदाधिकारी ही क्यों न हो। सभी छात्रों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 10 दिनों के अंदर जुर्माने का भुगतान करें और रसीद मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय में जमा करें।
क्या हैं आरोप और जांच की रिपोर्ट?
विश्वविद्यालय के Chief Proctor के कार्यालय द्वारा जारी आदेशों में यह उल्लेख किया गया है कि छात्रों ने न केवल कैमरा और उसके स्टैंड्स को फोर्सफुल ढंग से हटाया, बल्कि एफआरटी पैनलों को भी अलग किया। वहाँ मौजूद सुरक्षा कर्मियों की बार‑बार अपील और चेतावनी का समूह ने पालन नहीं किया। इसके अलावा आरोप है कि कुछ छात्रों ने उत्पात और नारेबाज़ी कर परिसर के सामान्य कामकाज को बाधित किया।
दो महिला सुरक्षा कर्मियों को भी इस दौरान चोटें आईं, जिनके घुटनो से रक्तस्राव हुआ, जो इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। एफआरटी सिस्टम लगभग ₹20 लाख की लागत वाला है, इसलिए इसका नुकसान विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका भी माना गया।
छात्र राजनीति और प्रतिक्रियाएँ
इस फैसले के बाद JNU छात्रों और छात्र संघों में गुस्सा और नाराजगी का माहौल है। कई छात्र संगठन इस कार्रवाई को छात्रों के खिलाफ सख्त रुख़ के रूप में देखते हैं और इसे “विरोध का दबदबा” कह रहे हैं। कुछ समर्थकों का मत है कि यह निलंबन छात्रों की आवाज़ को दबाने की चुनौती को दर्शाता है, खासकर जब यह सर्विलांस और निजता के मुद्दों से जुड़ा विवाद है।
लेकिन दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि कानून हर किसी के लिए समान रूप से लागू होता है, और यदि कोई नियम का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नीति‑निर्धारण की आवश्यकता है ताकि सुरक्षा और अनुशासन दोनों ही सुनिश्चित रह सकें।
नियम बनाम आंदोलन — विवाद का बड़ा पक्ष
कुछ छात्रों का यह मानना है कि यह मामला छात्रों के आंदोलन और सर्विलांस तकनीकों के विरोध से जुड़ा हुआ है, क्योंकि कई यूज़र्स का मानना है कि एफआरटी जैसे सिस्टम छात्रों की निजता और स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। वे इसे शैक्षणिक स्थलों पर निगरानी बढ़ाने का एक कदम मानते हैं, जो शैक्षिक स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ है।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा तकनीक किसी भी संस्थान की ज़रूरत है,और इसे किसी भी परिस्थिति में नुकसान पहुँचाना अनुशासनहीन और गैरज़िम्मेदाराना व्यवहार है। सार्वजनिक संपत्ति के प्रति सम्मान और नियमों का पालन, प्रशासन की नजर में, हर छात्र का कर्तव्य है।
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