ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत का केंद्रीय बजट 2026‑27 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया गया, जिसे वित्त मंत्री ने देश के लिए एक विकास‑उन्मुख और समावेशी बजट बताया। इस बजट पर देश के अलग‑अलग हिस्सों से प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। इन प्रतिक्रियाओं में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया विशेष रूप से सकारात्मक रही है, जिसमें उन्होंने बजट की सराहना करते हुए इसकी दिशा और सोच को महत्व दिया।
रेखा गुप्ता ने बजट को बताया ‘विकसित भारत की नींव’
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट 2026‑27 को विकसित भारत की नींव बताते हुए कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं, गरीबों, मजदूरों, व्यापारियों और छोटे‑मझोले वर्गों के हितों को ध्यान में रखा गया है।
रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि बजट विकास के हर पहलू को कवर करता है, खासकर रोजगार सृजन और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे युवाओं के भविष्य को मजबूती मिल सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री से आभार
रेखा गुप्ता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद कहा, जिन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए इस बजट का निर्माण किया। उन्होंने बजट को सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांतों के अनुरूप बताया और कहा कि यह हर वर्ग की आकांक्षाओं को सशक्त करेगा।मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि बजट में पूंजीगत व्यय (capital expenditure) के लिए आवंटन, राज्यों और केंद्र के सहयोग को बढ़ावा देगा और बुनियादी ढांचे के विकास को गति प्रदान करेगा।
बजट में राज्य‑केंद्र सहयोग की अहमियत
रेखा गुप्ता ने बजट में राज्य और केन्द्र के सहयोग की अवधारणा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बजट ने यह दिखाया है कि राज्यों के विकास और केंद्र के विज़न को संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसे सहयोग से न केवल राजसी परियोजनाओं को बल मिलेगा बल्कि विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, और तकनीकी क्षेत्रों में भी विकास को मजबूती मिलेगी। इस सहयोग की भावना दिल्ली‑वाराणसी हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट में भी देखी जा सकती है, जिसे रेखा गुप्ता ने ऐतिहासिक और प्रगति‑प्रेरक परियोजना बताया।
केंद्रीय आवंटन और दिल्ली के लिए अवसर
बजट में 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव रखा गया है, जो राज्यों के विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने इसे राज्यों के बीच सामंजस्यपूर्ण विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया। इस बड़े आवंटन से दिल्ली के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा प्रणाली और रोज़गार के अवसरों में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। उदाहरण के लिए, बजट के तहत योजनाओं का लाभ युवाओं, गरीबों तथा मध्यम वर्ग को मिल सकता है।
युवाओं और रोजगार पर जोर
बजट 2026 में रोज़गार सृजन, कौशल विकास और तकनीकी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट युवाओं के सपनों को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और समाधान‑उन्मुख दृष्टिकोण का संकेत बजट ने दिया है। यह उल्लेखनीय है, क्योंकि युवाओं की भागीदारी भारत की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाती है। बजट ने इस दिशा में कदम उठाकर शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास को प्रमुखता दी है।
किसानों, व्यापारियों और मध्यवर्ग पर फोकस
बजट में किसानों, व्यापारियों और मध्यम वर्ग के हितों को भी महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बजट सब वर्गों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह संतुलित दृष्टिकोण देश के आर्थिक ढांचे को और मजबूत करेगा और समावेशी विकास को बढ़ावा देगा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि बजट का प्रभाव केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वास्तविक जीवन में सामाजिक और आर्थिक बदलाव ला सके। मुख्यमंत्री के अनुसार बजट ने यही कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन का प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि बजट ने भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी महत्व दिया है और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। यह दृष्टिकोण स्थानीय आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था के उत्थान को बल देगा। एक समृद्ध और सुरक्षित सांस्कृतिक धरोहर अन्य देशों को आकर्षित करेगी और रोज़गार तथा विदेशी मुद्रा सृजन में भी मदद करेगी। बजट ने इस दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया है।
विकसित भारत की ओर: एक व्यापक दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट को विकसित भारत 2047 के विज़न के संदर्भ में भी देखा। यह बजट विकास की एक स्पष्ट रूपरेखा प्रदान करता है, जिसमें लगातार सुधार और आर्थिक स्थिरता को प्रमुखता दी गई है। यह दृष्टिकोण देश की दीर्घकालिक प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि केवल कर कटौती या नए योजनाओं से नहीं, बल्कि केंद्रीय और राज्य के बीच सहयोगपूर्ण रणनीति से ही विकास संभव है।
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