ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली हाईकोर्ट ने गाजीपुर मुर्गा मंडी (GhaziPur Chicken Market) में अवैध वध और जानवरों का क्रूर दुरुपयोग जारी रहने को “भयानक” बताया है और सिविक एजेंसियों — खासकर दिल्ली नगर निगम (MCD) — को कड़ी चेतावनी दी है कि 2018 के आदेश को लागू न करने की स्थिति में आवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट की यह सख्त प्रतिक्रिया उस याचिका के बाद आई है जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि देश की राजधानी के सबसे बड़े मुर्गा मंडी में अभी भी कानून के विपरीत पंखी और अन्य पक्षियों का काटा जा रहा है, जबकि कोर्ट ने 2018 में ही ऐसे वध पर रोक लगाई थी।
2018 का आदेश: क्या था उसमें लिखा?
हाईकोर्ट ने 24 सितंबर 2018 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि गाजीपुर मुर्गा मंडी में यानी चिकन बाजार में पक्षियों का वध पूरी तरह से रोका जाए। उस आदेश ने कहा कि जब तक एक पर्यावरण एवं नियमों के अनुरूप बाज़ार/स्लॉटर हाउस तैयार नहीं होता, तब तक सिर्फ़ ताज़ा (लाइव) पक्षियों की बिक्री की इजाज़त होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण रोकथाम जैसे नियमों का पालन करना आवश्यक है, ताकि मंडी का संचालन कानूनी और सुरक्षित तरीके से हो सके।
क्या हो रहा है गाजीपुर में आज भी?
हालिया कोर्ट सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने तस्वीरें और साक्ष्य पेश किए गए, जिनमें साफ दिख रहा है कि पक्षियों को काटना और वध करना जारी है, जबकि वह खुद कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ है। जानवरों के अवैध वध, खुले‑आम कटान, अस्वच्छ स्थितियों और लाइसेंस के बिना चल रहे स्लॉटर हाउसेस को लेकर कोर्ट ने सख्त चिंता जताई है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या 2018 के आदेश को गंभीरता से लिया गया है या नहीं।
MCD के वकील तुषार सन्नू ने कोर्ट को बताया कि कुछ अवैध इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और बिना लाइसेंस कार्यरत स्लॉटरहाउस के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा है कि अगर कोर्ट के आदेश का संतोषजनक पालन नहीं हो रहा तो आगे की कार्रवाई अपरिहार्य है।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
1. MCD और सभी संबंधित सिविक एजेंसियाँ दो हफ्तों के भीतर कोर्ट को एक डीटेल्ड कर्रवाई रिपोर्ट/हलफनामा दें, जिसमें यह बताना होगा कि 2018 के आदेश को लागू करने के लिए कौन‑कौन से कदम उठाए गए।
2. अगर कानून के आदेश का पालन नहीं पाया जाता है तो आवमानना (Contempt) की कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट की टिप्पणी थी, “यह भयानक है — कृपया सुनिश्चित करें कि आदेश का पालन हो।”
यह मामला क्यों गंभीर है?
1. जानवरों के अधिकार और कल्याण
गाजीपुर मंडी में पक्षियों का खुलेआम और गैर‑कानूनी वध पशु अधिकारों और कल्याण से जुड़े कानूनों का सीधा उल्लंघन है। इसके चलते एनिमल वेलफेयर एक्ट को भी चुनौती मिलती है। कोर्ट को यह भी चिंता है कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
2. पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य
अवैध वध से निकलने वाले अपशिष्ट, खून‑चर्बी और गंदगी न सिर्फ़ सामान्य जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं बल्कि मंडी के आसपास के इलाकों में प्रदूषण और बदबू का कारण भी बनते हैं। इन स्थितियों से स्थानीय निवासी और ग्राहक दोनों प्रभावित होते हैं।
3. कानून का पालन और सरकारी ज़िम्मेदारी
2018 का आदेश केवल तभी सफल माना जाएगा जब सभी एजेंसियाँ उसका पालन प्रभावी रूप से करें और अवैध गतिविधियों को नियंत्रण में रखें। ऐसे में अगर आदेश लागू नहीं हो रहा है, तो इससे न्यायपालिका और प्रशासन के बीच भरोसे का प्रश्न उठता है।
पिछले प्रयास और निगरानी
गाजीपुर मुर्गा मंडी को लेकर पहले भी कई पशु अधिकार संगठनों की याचिकाएँ दायर हुई हैं, जिसमें यह कहा गया था कि शक्तिशाली निगरानी समिति बनाई जाए और सप्ताह‑भर की नियमित इंस्पेक्शन हो ताकि अवैध गतिविधियाँ रोकी जा सकें। 2018 के आदेश के बाद कई बार मॉनिटरिंग और निरीक्षण की बात हुई है, लेकिन स्थानीय निगरानी और अनुपालन की कमी के कारण ऐसे वध और कटान के मामलों को रोका नहीं जा सका। ऐसा ही मामला कोर्ट के सामने फिर से आया है।
MCD का पक्ष और भविष्य की कार्रवाई
MCD के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि अवैध रूप से संचालित स्लॉटरहाउस के खिलाफ आरोपों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे। लेकिन कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ आग्रह और कार्रवाई का वादा पर्याप्त नहीं है — इस पर कागज़ी सबूत और रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करना ज़रूरी है। अगली सुनवाई में इन रिपोर्टों को देखा जाएगा।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों की चिंता
घाटीपुर मुर्गा मंडी स्थानीय व्यापारियों का एक बड़ा केंद्र है, जहाँ रोज़ाना हज़ारों लोग व्यापार करते हैं, मुर्गा खरीदते और बेचते हैं. अवैध स्लॉटरहाउस के कारण स्वास्थ्य‑सम्बंधित जोखिम और मंडी की प्रतिष्ठा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में कई स्थानीय लोगों ने कहा है कि कानून का सही लागू होना सबकी भलाई के लिए जरूरी है।
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