ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसकी नेता प्रतिपक्ष अतिशी पर तीखा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिरसा का कहना है कि यह पूरा विवाद एक झूठ को सच साबित करने की साजिश है और AAP इसे छुपाने के लिए कई स्तर पर झूठ बोल रही है।
आरोप: झूठ को सच बताने की कोशिश
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि AAP और पंजाब सरकार द्वारा पेश की गई फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट गुमराह करने वाली है। वे आरोप लगा रहे हैं कि रिपोर्ट बिना मूल विधानसभा वीडियो, बिना अतिशी के वॉइस सैंपल और बिना किसी विशेषज्ञ की भागीदारी के तैयार की गई है। सिरसा ने इसे कहानी लेखन करार दिया और कहा कि इससे वीडियो के वास्तविक तथ्यों को छिपाया जा रहा है।
सिरसा ने यह भी कहा कि अगर सच सामने लाने का इरादा था, तो जिन लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की पुलिस सूची पेश कर रही है, उन्हें आरोपित क्यों नहीं बनाया गया। उनके मुताबिक, दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी के समय किए गए कथित अपमान को AAP छिपाने की कोशिश कर रही है।
फॉरेंसिक जांच पर विवाद
मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऑडियोटेक फॉरेंसिक रिपोर्ट को पूरी तरह अनुचित और नकली बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस द्वारा अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वीडियो में किस हिस्से में छेड़छाड़ हुई है। सिरसा का आरोप है कि यह कोई वैज्ञानिक जांच नहीं बल्कि एक बायस्ड रिपोर्ट है।
सिरसा ने यह भी सवाल उठाया कि जब पंजाब में उच्च स्तरीय फ़ॉरेंसिक जांच के लिए मूल सैंपल नहीं मिलने पर पुलिस ने जांच नहीं की, तो फिर दिल्ली वीडियो के लिए बिना मूल फुटेज के इतनी जल्दी रिपोर्ट कैसे तैयार कर दी गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और AAP की नज़र
इस पूरे विवाद में AAP ने सीधा पलटवार किया है। AAP के नेता ने फॉरेंसिक रिपोर्ट और हालिया अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि अतिशी ने वास्तव में ‘गुरु’ शब्द का उपयोग नहीं किया था और वीडियो में जो आपत्तिजनक टिप्पणी दिखाई गई थी, वह संपादित एवं भ्रामक है।
एक अदालत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उस वीडियो को हटाने का आदेश दिया है, क्योंकि फैलाए गए वीडियो से सामाजिक विरोध और सांप्रदायिक तनाव फैलने की संभावना थी।
विवाद की शुरुआत और वायरल वीडियो
यह पूरा मुद्दा तब शुरू हुआ जब एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई जिसमें यह दावा किया गया कि दिल्ली विधानसभा के अंदर अतिशी ने गुरु तेग बहादुर जी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बाद में पुलिस को संदिग्ध वीडियो की फ़ॉरेंसिक जांच के लिए कहा गया।
जालंधर पुलिस की जांच में पाया गया कि वीडियो को संपादित किया गया था और उसमें फ़र्जी सबटाइटल्स जोड़े गए थे, जिससे इस तरह का भ्रम फैला कि अतिशी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। पुलिस ने FIR दर्ज की और मामले को गंभीर रूप से लिया गया।
राजनीति और सच्चाई की जंग
इस विवाद ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया क्लिप्स आज की राजनीति में कितना बड़ा हथियार बन गए हैं। एक ओर BJP के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा AAP और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर AAP यह दावा कर रही है कि उन्हें झूठे आरोपों से बचाया गया है। इस पूरे मामले में अदालत, पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका भी चर्चा में है, क्योंकि वीडियो हटाने और फ़ॉरेंसिक रिपोर्ट की बातों ने इस विवाद को और बढ़ा दिया है।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सोशल मीडिया पर फैलाई गई जानकारी, फॉरेंसिक तकनीक और धार्मिक भावनाओं के संरक्षण जैसे मुद्दों को भी उजागर कर रहा है।
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