ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली से सटे नेशनल हाईवे पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब केंद्र की एजेंसी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सख्त रुख अपना लिया है। NHAI ने नगर निगम (MCD) को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि हाईवे पर बने टोल प्लाजा जल्द हटाए जाएं, नहीं तो एजेंसी खुद कार्रवाई करेगी।
जाम और प्रदूषण बना बड़ी समस्या
दिल्ली और एनसीआर के बॉर्डर इलाकों में रोजाना लाखों वाहन दाखिल होते हैं। टोल प्लाजा पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ते ही लंबा जाम लग जाता है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। सबसे गंभीर असर वायु प्रदूषण पर पड़ रहा है, क्योंकि जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहा है।
MCD के साथ हुई अहम बैठक
NHAI ने इस मुद्दे को लेकर 10 जनवरी को MCD और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में नवंबर में भेजे गए उस पत्र का जिक्र किया गया, जिसमें टोल प्लाजा हटाने के निर्देश दिए गए थे। NHAI अधिकारियों ने नाराजगी जताई कि महीनों बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
टोल प्लाजा जाम, हादसे और प्रदूषण की वजह
NHAI का कहना है कि हाईवे पर बने टोल प्लाजा ट्रैफिक की सबसे बड़ी बाधा बन चुके हैं। यहां वाहन रुकते हैं, लाइन लगती है और कई बार आपसी टकराव भी हो जाता है। लंबे जाम के कारण दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसी आधार पर MCD को उन सभी टोल प्लाजा की सूची सौंपी गई है, जिन्हें हटाने की जरूरत बताई गई है।
यूनिपोल पर भी कार्रवाई की तैयारी
टोल प्लाजा के साथ-साथ हाईवे किनारे लगे बड़े विज्ञापन यूनिपोल भी NHAI के निशाने पर हैं। एजेंसी का मानना है कि ये यूनिपोल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं और ट्रैफिक बाधित करते हैं। NHAI ने स्पष्ट किया है कि अगर MCD इन्हें खुद नहीं हटाता, तो एजेंसी कार्रवाई करेगी और इसका पूरा खर्च नगर निगम से वसूला जाएगा।
कौन-कौन से टोल बने परेशानी की वजह
NHAI के पत्र में कई प्रमुख टोल प्लाजा का जिक्र है। इनमें दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर कापसहेड़ा इलाके का बिजवासन टोल प्लाजा प्रमुख है, जहां द्वारका एक्सप्रेसवे के पास रोज लंबा जाम लगता है। इसके अलावा रज्जोकरी, बदरपुर, रनोकरी बॉर्डर, झिंझोली, आया नगर और मेरठ एक्सप्रेसवे समेत कई जगहों के टोल प्लाजा को भी हटाने की मांग की गई है।
बदरपुर बॉर्डर पर दोहरी मार
बदरपुर बॉर्डर की स्थिति सबसे जटिल बताई जा रही है। यहां महज 50 मीटर के दायरे में NHAI और MCD दोनों के टोल प्लाजा हैं। एक तरफ फास्टैग से टोल लिया जाता है, तो दूसरी ओर MCD RFID के जरिए टैक्स वसूलता है। इससे वाहन चालकों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है संकेत
दिल्ली बॉर्डर के टोल प्लाजा का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दिसंबर में हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया था कि भारी जाम और प्रदूषण वाले नौ टोल प्लाजा को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विचार किया जाए।
एनवायरनमेंट सेस बना सबसे बड़ा पेच
हालात जस के तस रहने की सबसे बड़ी वजह MCD का एनवायरनमेंट सेस है। कॉमर्शियल वाहनों से वसूले जाने वाले इस सेस को लेकर NHAI और MCD के बीच तालमेल की कमी साफ दिख रही है। इसका खामियाजा रोजाना लाखों वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि NHAI की सख्ती के बाद इस दिशा में कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं।
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