ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
जर्मनी के म्यूनिख शहर में आयोजित Munich Security Conference के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सम्मेलन में प्रवेश से पहले एक सुरक्षा अधिकारी उनसे अपना पहचान पत्र (आईडी कार्ड) ठीक से सामने दिखाने के लिए कहता है।
यह घटना उस समय हुई जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपनी टीम के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। एंट्री गेट पर तैनात सुरक्षा अधिकारी ने उनके गले में लटके नाम बैज की ओर इशारा करते हुए कहा, “क्या आप इसे सामने की ओर कर सकते हैं?” अधिकारी ने उनसे आईडी कार्ड को स्पष्ट रूप से सामने रखने का अनुरोध किया। पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
सुरक्षा प्रक्रिया या प्रोटोकॉल?
वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया बता रहे हैं, जहां हर प्रतिनिधि को समान नियमों का पालन करना होता है। वहीं कुछ लोग इसे लेकर मजाकिया टिप्पणियां भी कर रहे हैं।
दरअसल, म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सुरक्षा बेहद कड़ी होती है। यहां दुनिया भर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख शामिल होते हैं। ऐसे में पहचान पत्र स्पष्ट रूप से दिखाना अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
सिंधी संगठन का विरोध
इस बीच जर्मनी में मौजूद सिंधी राजनीतिक संगठन Jeay Sindh Muttahida Mahaz (JSMM) ने आसिम मुनीर की सम्मेलन में भागीदारी का विरोध किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन स्थल के बाहर प्रदर्शन किया और पाकिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया।
JSMM के चेयरमैन शफी बुरफत ने United Nations, European Union, जर्मन सरकार और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को एक बयान भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि ऐसे वैश्विक मंच पर आसिम मुनीर की मौजूदगी चिंताजनक है और इससे मानवाधिकार मुद्दों को नजरअंदाज किया जा सकता है।
क्यों अहम है म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस?
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस दुनिया का एक प्रतिष्ठित मंच है, जहां हर साल वैश्विक सुरक्षा, शांति, रक्षा रणनीति और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा होती है। इस मंच पर अमेरिका, यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों के शीर्ष नेता और नीति निर्माता शामिल होते हैं।
इस साल भी सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ऐसे में पाकिस्तान सेना प्रमुख की मौजूदगी और उससे जुड़ा यह वीडियो चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर बहस तेज
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे सामान्य सुरक्षा जांच बताया, जबकि अन्य ने इसे पाकिस्तान की छवि से जोड़कर देखा। हालांकि अभी तक पाकिस्तान सेना या सम्मेलन आयोजकों की ओर से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कुल मिलाकर, यह घटना भले ही एक सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा रही हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच और संबंधित व्यक्तित्व की वजह से यह चर्चा का केंद्र बन गई है। साथ ही JSMM के विरोध ने इस पूरे मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!