भारत-बांग्लादेश संबंध सुधारने की कोशिश: यूनुस सरकार भारत से 50,000 टन चावल आयात करेगी
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत से 50,000 टन चावल आयात का फैसला किया गया है।
भारत-बांग्लादेश संबंध सुधारने की कोशिश: यूनुस सरकार भारत से 50,000 टन चावल आयात करेगी
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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने कहा है कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि नई दिल्ली के साथ संबंध सामान्य करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है और सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है। अहमद ने यह बातें अपने कार्यालय में खरीद संबंधी सलाहकार परिषद समिति की बैठक के बाद मीडिया से साझा कीं।

 

राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखी जाएगी अर्थव्यवस्था

 अहमद ने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश की व्यापार नीति राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरतों से तय होती है। उनके अनुसार, यदि किसी देश से आयात सस्ता पड़ता है, तो वही देश बांग्लादेश के लिए बेहतर विकल्प है। भारत के साथ आर्थिक सहयोग को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस संबंधित पक्षों से संपर्क में हैं और रिश्तों में सुधार के लिए संवाद जारी है।

 

भारत से 50,000 टन चावल खरीदने का फैसला

 सरकार ने भारत से 50,000 टन चावल आयात करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अहमद के मुताबिक, भारत से चावल मंगाना देश की अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभकारी है, क्योंकि वियतनाम जैसे अन्य देशों की तुलना में लागत अधिक आती है। उन्होंने बताया कि वियतनाम से चावल आयात करने पर प्रति किलोग्राम लगभग 10 बांग्लादेशी टका अधिक खर्च पड़ता। इसलिए आर्थिक हिसाब से भारत से खरीदना तर्कसंगत कदम है। यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

रिश्तों में तनाव, लेकिन स्थितिबेदह नहीं

 हाल के दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में खिंचाव देखा गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया और कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए। विश्लेषकों का मानना है कि 1971 के बाद यह रिश्ता सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हालांकि अहमद ने कहा कि स्थिति उतनी खराब नहीं है जितनी बाहर से दिख रही है। उनके अनुसार, कुछ बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं माहौल को तनावपूर्ण बनाती हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच बुनियादी कूटनीतिक पुल अब भी कायम हैं।

 

बाहरी ताकतों की भूमिका पर संकेत

 जब उनसे पूछा गया कि क्या बाहरी ताकतें संबंधों में खटास बढ़ा रही हैं, तो अहमद ने कहा कि ऐसा संभव है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट पैदा करने का प्रयास किसी के हित में नहीं है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि विरोध-प्रदर्शन या कठोर बयान पूरे राष्ट्र की भावना का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे अस्थायी परिस्थितियों का परिणाम होते हैं।

 

आगे का रास्ता: संवाद और सहयोग

 अहमद ने उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और खराब नहीं होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आर्थिक सहयोग से राजनीतिक तनाव भी धीरे-धीरे कम होगा। दोनों देशों के लिए स्थिर रिश्ते व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी हैं।

 

कुल मिलाकर, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार यह संकेत दे रही है कि राजनीतिक मतभेदों से इतर आर्थिक साझेदारी और कूटनीतिक संवाद जारी रहेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्रयासों का ठोस परिणाम द्विपक्षीय संबंधों में कैसे दिखाई देता है।

 

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