“हमें ग्रीनलैंड चाहिए”: ट्रंप के बयान पर डेनमार्क-ग्रीनलैंड की दो टूक प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर “राष्ट्रीय सुरक्षा” का तर्क देते हुए बड़ा दावा किया और कोलंबिया पर भी कड़ा रुख दिखाया। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई, वहीं NATO के आर्टिकल 5 को लेकर भी बहस तेज हो गई।
 “हमें ग्रीनलैंड चाहिए”: ट्रंप के बयान पर डेनमार्क-ग्रीनलैंड की दो टूक प्रतिक्रिया
  • Category: विदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस बार मामला सिर्फ किसी विरोधी देश तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसा इलाका भी इसमें आ गया है जो अमेरिका का नहीं है और जिस देश के तहत आता है, वह अमेरिका का पुराना सहयोगी माना जाता है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर खुलकर कहा कि “हमें ग्रीनलैंड चाहिए”, और साथ ही कोलंबिया को लेकर भी सख्त भाषा में बात की। इन बयानों के बाद यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका तक हलचल बढ़ गई है।

वेनेजुएला के बाद क्यों बढ़ी सख्ती?

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को अपनी बड़ी कामयाबी बताया है। इसके बाद उनके हालिया बयानों में ज्यादा आक्रामक रुख नजर आ रहा है। कहा जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद ट्रंप का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और उसी के असर में अब उनका रवैया विरोधी देशों के साथ-साथ सहयोगियों के प्रति भी कड़ा होता जा रहा है।

यही वजह है कि अब बयान सिर्फ चेतावनी तक नहीं, बल्कि “संभावित सैन्य कार्रवाई” जैसे संकेतों की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। दुनिया की राजनीति में ऐसे संकेत अक्सर तनाव बढ़ाते हैं, क्योंकि एक बयान के बाद कई देश अपनी रणनीति और सुरक्षा को लेकर सतर्क हो जाते हैं।

हमें ग्रीनलैंड चाहिए” – ट्रंप का दावा

ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और यह “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड रणनीतिक इलाका है और वहां रूसी व चीनी जहाजों की मौजूदगी की बात कही। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह दावा भी किया कि डेनमार्क ग्रीनलैंड को ठीक से संभाल नहीं सकता।

यह बयान इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा नहीं है। यह डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क अमेरिका का पुराना NATO सहयोगी माना जाता है। यानी यहां बात सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि रिश्तों और गठबंधन की भी है।

डेनमार्क और यूरोप में क्यों बज गई खतरे की घंटी?

ट्रंप की टिप्पणी के बाद यूरोप में चिंता बढ़ने की बात कही गई है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को अपने “ऐतिहासिक सहयोगी” को धमकाना बंद करना चाहिए, और उन्होंने ट्रंप के बयान को अस्वीकार्य बताया।

यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं माना जा रहा। यूरोप में इसे एक तरह की दबाव की नीति या धमकी की तरह देखा जा रहा है, खासकर तब जब बयान किसी ऐसे क्षेत्र पर हो जो दूसरे देश के नियंत्रण में है।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री का साफ जवाब

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने भी ट्रंप के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए साफ कहा कि “हमारा देश बिक्री के लिए नहीं है।” इस जवाब के बाद साफ हो गया कि ग्रीनलैंड की सरकार किसी भी हालत में बाहरी दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

इस तरह की बातें अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बहुत मायने रखती हैं, क्योंकि किसी इलाके की स्थानीय सरकार का स्टैंड यह तय करता है कि आगे बातचीत की गुंजाइश है या टकराव की। फिलहाल उनके बयान से यही संकेत मिलता है कि वे किसी “दावे” को सीधे खारिज कर रहे हैं।

एक पोस्ट से और बढ़ गया विवाद

विवाद तब और बढ़ गया जब ट्रंप के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें उसे अमेरिकी झंडे के रंगों में दिखाया गया था। पोस्ट के साथ उन्होंने “जल्द ही” लिखा। इस पोस्ट को यूरोप में धमकी की तरह देखा जा रहा है।

अक्सर ऐसे प्रतीकात्मक पोस्ट भी बड़ा संदेश बन जाते हैं, खासकर जब पोस्ट किसी बड़े सरकारी पद से जुड़े व्यक्ति के परिवार की तरफ से आए। इससे कूटनीतिक स्तर पर गलतफहमियां बढ़ सकती हैं और बयानबाजी का दायरा और फैल जाता है।

NATO का आर्टिकल 5 बीच में क्यों आ गया?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर ग्रीनलैंड पर किसी तरह की जबरन कार्रवाई की कोशिश होती है, तो क्या NATO का आर्टिकल 5 लागू होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस आर्टिकल के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। चूंकि डेनमार्क NATO का सदस्य है, इसलिए उस पर किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई NATO को सीधे बड़े टकराव की तरफ ले जा सकती है।

यही बात इस पूरे विवाद को और संवेदनशील बना देती है। क्योंकि यहां सिर्फ अमेरिका और डेनमार्क नहीं, बल्कि पूरा गठबंधन और उसकी प्रतिक्रिया भी चर्चा में आ जाती है।

कोलंबिया पर भी सख्त तेवर

ग्रीनलैंड के साथ-साथ ट्रंप ने कोलंबिया को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें “ऑपरेशन कोलंबिया” नाम अच्छा लगता है, और कोलंबिया पर ड्रग्स की तस्करी के आरोप लगाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे ही आरोप उन्होंने पहले वेनेजुएला पर भी लगाए थे।

यह बयान कोलंबिया के लिए दबाव बढ़ाने जैसा माना जा सकता है, क्योंकि ड्रग्स तस्करी का मुद्दा पहले से ही अमेरिका-लैटिन अमेरिका संबंधों में तनाव का कारण रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल ये बयान दुनिया में नई बहस छेड़ चुके हैं—क्या यह सिर्फ बयानबाजी है या आने वाले दिनों में कोई ठोस कदम भी दिखेगा। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रियाओं के बाद इतना साफ है कि मामला शांत नहीं होने वाला। वहीं, NATO के आर्टिकल 5 की चर्चा बताती है कि स्थिति बिगड़ी तो असर बहुत बड़ा हो सकता है।

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