ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पड़ोसी
देश बांग्लादेश में दिसंबर का यह महीना हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए भय और चिंता का रहा।
सिर्फ दस दिन में कई निर्दोष हिंदुओं की बेरहमी से हत्या ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा
बल्कि मानवाधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिए हैं। घरों में बंद किए गए परिवार,
आग से तबाह मकान और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर संकट है। यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि भारत सरकार
इस दिशा में क्या कदम उठा सकती है।
10
दिन में तीन निर्दोषों की हत्या
दिसंबर
में सबसे पहले दीपू चंद्र दास नामक 27 वर्षीय व्यक्ति की मयमनसिंह जिले में पीट-पीटकर
हत्या की गई और बाद में भीड़ ने उन्हें जला दिया। अधिकारियों ने बाद में कहा कि उन
पर लगाए गए ईशनिंदा के आरोप झूठे थे। इसके एक हफ्ते बाद राजबाड़ी जिले के पांगशा में
29 वर्षीय अमृत मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। तीसरी घटना मयमनसिंह जिले में
हुई, जहां 40 वर्षीय बजेंद्र बिस्वास को उनके मुस्लिम साथी ने गोली मार दी।
दीपू
चंद्र दास और अमृत मंडल की वीभत्स हत्या
दीपू
चंद्र दास भालुका में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। उन पर अफवाह फैलाई गई कि
उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की। रात करीब 9 बजे सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उन्हें पकड़
लिया और बेरहमी से पीटा। उनकी मृत्यु के बाद भीड़ ने उन्हें पेड़ से बांधकर जला दिया।
दीपू
की हत्या के एक हफ्ते बाद राजबाड़ी जिले के पांगशा में अमृत मंडल को भीड़ ने लिंच कर
मार डाला। रात के समय कुछ लोग उनके घर गए और उपद्रवियों ने डाकू-डाकू का शोर मचाया।
भीड़ ने उन्हें पकड़कर पीटना शुरू किया और अस्पताल ले जाने के बाद अमृत मंडल ने दम
तोड़ दिया।
बजेंद्र
बिस्वास- सुरक्षा बल में भी खतरा
मयमनसिंह
जिले में भालुका के 40 वर्षीय बजेंद्र बिस्वास, जो अंसार बल के सदस्य थे, को उनके ही
मुस्लिम साथी ने गोली मार दी। ड्यूटी के दौरान निशाना बने बिस्वास की मौत यह दिखाती
है कि अब सुरक्षा में लगे अल्पसंख्यक कर्मी भी सुरक्षित नहीं हैं।
घरों
में आग और अल्पसंख्यक परिवारों की सुरक्षा
हत्याओं
के अलावा पिरोजपुर जिले में 5-6 हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई। रात के समय
जब परिवार सो रहे थे, तो उपद्रवियों ने दरवाजे बाहर से बंद कर दिए। परिवारों ने भागकर
अपनी जान बचाई। यह घटना स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय लगातार
खतरे में है।
भारत
सरकार के संभावित कदम
विशेषज्ञों
का मानना है कि भारत सरकार को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने
के लिए कूटनीतिक दबाव बनाना चाहिए। इसमें उच्च स्तरीय वार्ता, संयुक्त सुरक्षा निगरानी
और मानवाधिकार समूहों के माध्यम से दबाव डालना शामिल हो सकता है। इसके अलावा, भारत
वीजा नीति, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग में अस्थायी कदम उठाकर भी संदेश दे सकता है।
बांग्लादेश
में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा चिंता का विषय है और इस दिशा में भारत द्वारा सक्रिय
कदम उठाना समय की मांग है।
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