बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या: ड्यूटी पर मौजूद अंसार सदस्य को सहकर्मी ने गोली मारी
बांग्लादेश के मयमनसिंह में ड्यूटी पर तैनात हिंदू अंसार सदस्य बजेंद्र बिस्वास की सहकर्मी द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी; दिसंबर में लगातार ऐसी घटनाओं से चिंता बढ़ी।
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या: ड्यूटी पर मौजूद अंसार सदस्य को सहकर्मी ने गोली मारी
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। मयमनसिंह इलाके से एक और हत्या की घटना सामने आई है, जहां ड्यूटी पर तैनात एक हिंदू व्यक्ति को उसके ही सहकर्मी ने गोली मार दी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले एक फैक्ट्री वर्कर की भीड़ द्वारा हत्या की खबरें भी सामने आई थीं।

कौन थे बजेंद्र बिस्वास?

इस घटना में मारे गए व्यक्ति का नाम बजेंद्र बिस्वास बताया गया है और उनकी उम्र करीब 40 साल थी। रिपोर्ट के अनुसार वे “अंसार” बल के सदस्य थे, जो बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के तहत एक सहायक अर्धसैनिक बल माना जाता है और देश में आंतरिक सुरक्षा व कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाता है। बजेंद्र जिस जगह तैनात थे, वह एक गारमेंट फैक्ट्री बताई गई है।

वारदात कहां और कब हुई?

घटना मयमनसिंह के भालुका उपजिला इलाके में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह गोलीबारी सोमवार शाम करीब 6:30 बजे “सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड” नाम की फैक्ट्री के मेहराबारी क्षेत्र में हुई। उसी समय वहां कई अंसार सदस्य ड्यूटी पर मौजूद थे।

क्या मैं गोली मार दूं?”—फिर चली गोली

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी का नाम नोमान मिया बताया गया है, जो उसी अंसार बल का सदस्य था। घटनाक्रम को लेकर एक चश्मदीद अंसार सदस्य एपीसी अजहर अली का बयान सामने आया है। उनके अनुसार नोमान मिया और बजेंद्र बिस्वास उनके कमरे में साथ बैठे थे, तभी अचानक नोमान ने शॉटगन तानी और कहा—“क्या मैं गोली मार दूं?” और फिर उसने गोली चला दी।

बताया गया कि गोली बजेंद्र की बाईं जांघ में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। चश्मदीद के मुताबिक गोली चलने से पहले दोनों के बीच कोई बड़ा झगड़ा या बहस दिखाई नहीं दी।

अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टर ने मृत घोषित किया

घटना के बाद साथियों ने बजेंद्र बिस्वास को तुरंत स्थानीय उपजिला हेल्थ कॉम्प्लेक्स पहुंचाया। वहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन स्तर पर कार्रवाई की बात सामने आई।

आरोपी गिरफ्तार, जांच शुरू

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने तड़के एक ऑपरेशन चलाकर आरोपी नोमान मिया को गिरफ्तार कर लिया। मयमनसिंह जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (फाइनेंस एंड एडमिनिस्ट्रेशन) अब्दुल्ला अल मामुन के हवाले से कहा गया कि हमले के पीछे की वजह जानने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शवगृह भेजा गया है और कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

दिसंबर में लगातार घटनाएं: डर और गुस्सा

यह मामला अकेला नहीं बताया जा रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में यह इस तरह की तीसरी घटना है और मयमनसिंह में एक हफ्ते से कम समय में दूसरी। 24 दिसंबर को 29 साल के एक हिंदू युवक अमृत मंडल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने का आरोप भी रिपोर्ट में दर्ज है।

इतना ही नहीं, 18 दिसंबर को 25 साल के दीपु चंद्र दास की हत्या का भी जिक्र है, जहां उन पर कथित तौर पर झूठे ईशनिंदा के आरोप लगे और भीड़ ने उन्हें मारकर पेड़ से लटकाया, फिर आग लगा दी गई। इन घटनाओं की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ये कथित तौर पर काम की जगह या आसपास के इलाकों से जुड़ी बताई जा रही हैं, जहां आम इंसान रोजी-रोटी के लिए जाता है।

अल्पसंख्यकों पर हमले की चिंता क्यों बढ़ी?

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, के खिलाफ हिंसा बढ़ने की बातें सामने आई हैं, जिस पर कई जगह नाराज़गी और चिंता जताई गई। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर लोगों में डर क्यों बढ़ रहा है और सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है।

भारत की प्रतिक्रिया: “गंभीर चिंता”

इस पूरे माहौल पर भारत की तरफ से भी चिंता जताने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों—हिंदू, ईसाई और बौद्ध—के खिलाफ “लगातार दुश्मनी” को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि वह पड़ोस में हो रहे घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए है।

आगे क्या उम्मीद?

फिलहाल पुलिस जांच चल रही है और आरोपी गिरफ्तार बताया गया है, लेकिन सबसे अहम बात यह है कि हत्या की वजह क्या थी—यह अभी साफ नहीं है। अगर जांच में निजी रंजिश, ड्यूटी से जुड़ा विवाद या किसी और तरह का मकसद सामने आता है, तभी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। मगर लगातार आ रही घटनाएं यह संकेत जरूर देती हैं कि अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है, और प्रशासन पर दबाव भी बढ़ेगा कि वह सुरक्षा और न्याय दोनों को तेज़ी से सुनिश्चित करे।

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