ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की पहल पर बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। भारत ने इस नए मंच की पहली बैठक में एक पर्यवेक्षक देश के रूप में हिस्सा लिया। यह बैठक अमेरिका की राजधानी Washington, D.C. में स्थित United States Institute of Peace में आयोजित की गई। भारत की ओर से वॉशिंगटन में तैनात चार्ज डी' अफेयर्स नामग्या सी खम्पा ने प्रतिनिधित्व किया।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अवधारणा?
पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की रूपरेखा पेश की थी। उन्होंने इसे एक ऐसे वैश्विक मंच के रूप में बताया, जो शांति स्थापना और संघर्ष समाधान में अहम भूमिका निभाएगा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह बोर्ड गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की निगरानी और वहां की प्रशासनिक व्यवस्था में सहयोग कर सकता है।
ट्रंप ने दावा किया था कि यह संस्था भविष्य में संयुक्त राष्ट्र को टक्कर दे सकती है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मंच को लेकर जिज्ञासा और बहस दोनों बढ़ गई हैं।
कौन-कौन देश बने सदस्य?
वॉशिंगटन में आयोजित पहली बैठक में लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 27 देश बोर्ड के पूर्ण सदस्य हैं। सदस्य देशों में अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।
भारत और यूरोपीय संघ समेत कुछ अन्य देशों ने पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत फिलहाल इस मंच को करीब से देखना और समझना चाहता है।
भारत का सतर्क रुख
भारत को इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण पहले ही मिल चुका था, लेकिन शुरुआत में उसने कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया था। विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी को कहा था कि प्रस्ताव विचाराधीन है और इसकी समीक्षा की जा रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत पश्चिम एशिया में शांति को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, पहली बैठक में भारत की मौजूदगी से यह साफ हो गया है कि भारत इस पहल से दूरी भी नहीं बनाना चाहता। फिलहाल वह पूर्ण सदस्य बनने के बजाय पर्यवेक्षक की भूमिका में रहकर स्थिति का आकलन कर रहा है।
राहत पैकेज और ट्रंप की घोषणा
बैठक के दौरान ट्रंप ने बताया कि नौ सदस्य देशों—कजाकिस्तान, अजरबैजान, यूएई, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत—ने गाजा के लिए कुल 7 अरब डॉलर के राहत पैकेज पर सहमति जताई है।
इसके अलावा अमेरिका ने भी बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की। हालांकि, इस राशि का उपयोग किन क्षेत्रों में और कैसे किया जाएगा, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
आगे क्या?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक ने यह संकेत दिया है कि ट्रंप वैश्विक शांति और कूटनीति के क्षेत्र में एक नया मंच खड़ा करना चाहते हैं। भारत का पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होना यह दर्शाता है कि वह इस पहल को गंभीरता से ले रहा है, लेकिन फिलहाल सावधानी के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बोर्ड वास्तव में वैश्विक राजनीति में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है।
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