ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और भारत के बीच तकनीकी सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका अलायंस (Pax Silica Alliance) में शामिल हो गया। इस मौके पर अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और भारत के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद रहे। यह गठबंधन सेमीकंडक्टर (चिप), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
अमेरिका ने दिसंबर 2025 में इस पहल की शुरुआत की थी और अब भारत के जुड़ने से इसे एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
क्या है Pax Silica का मतलब?
“Pax Silica” नाम अपने आप में काफी अर्थपूर्ण है। “Pax” का मतलब है शांति और स्थिरता, जबकि “Silica” का संबंध सिलिकॉन से है, जो आधुनिक कंप्यूटर चिप्स का आधार है। यानी यह गठबंधन तकनीकी स्थिरता और सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है।
कोविड-19 महामारी और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के दौरान दुनिया ने देखा कि सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी उपकरणों की सप्लाई कुछ गिने-चुने देशों पर ही निर्भर थी। सप्लाई चेन में रुकावटों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। इसी अनुभव के बाद इस तरह के भरोसेमंद वैश्विक नेटवर्क की जरूरत महसूस की गई।
क्या चीन को ध्यान में रखकर बना है यह गठबंधन?
हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन का एक बड़ा उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना भी है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में अमेरिका और उसके सहयोगी देश एक वैकल्पिक और सुरक्षित नेटवर्क तैयार करना चाहते हैं।
यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का भी हिस्सा मानी जा रही है, जहां तकनीकी सहयोग को कूटनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। Pax Silica Alliance के जरिए सदस्य देश आपस में संसाधन, तकनीक और निवेश साझा कर सकेंगे।
कौन-कौन से देश हैं शामिल?
अमेरिका के नेतृत्व में इस गठबंधन में जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इजरायल, ब्रिटेन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश पहले से शामिल हैं। ये सभी देश टेक्नोलॉजी, चिप निर्माण, AI रिसर्च और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हैं।
अब भारत के शामिल होने से इस समूह की ताकत और बढ़ गई है। भारत तेजी से उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था और टेक्नोलॉजी हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
भारत के लिए क्या हैं फायदे?
भारत सरकार पहले ही “सेमीकंडक्टर मिशन” के तहत देश में चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही है। कई बड़ी कंपनियां भारत में निवेश की योजना बना रही हैं। Pax Silica Alliance में शामिल होने से भारत को तकनीकी सहयोग, विदेशी निवेश, रिसर्च पार्टनरशिप और ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी के नए अवसर मिलेंगे।
इससे देश में चिप डिजाइन, निर्माण और AI आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर सकता है।
कुल मिलाकर, यह गठबंधन भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ भारत के डिजिटल और तकनीकी भविष्य को भी मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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