ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
जॉर्डन को मध्य पूर्व में एक ऐसी ताकत माना जा रहा है, जो चुपचाप लेकिन बहुत मजबूती से अपनी जगह बनाए हुए है। पीएम नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा ने इस छोटे लेकिन अहम देश के रणनीतिक महत्व पर एक बार फिर सभी की नजरें टिका दी हैं।
जॉर्डन दौरे का बड़ा मतलब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जॉर्डन,
इथियोपिया
और ओमान के दौरे पर हैं, लेकिन जॉर्डन की राजधानी अम्मान में
उनका स्वागत और बैठकों ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है। इस यात्रा का मकसद पश्चिम
एशिया और अफ्रीका में भारत के रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना है, ताकि
बदलते भू-राजनीतिक हालात में भारत अपने हितों को और मजबूत कर सके।
जॉर्डन: मिडिल ईस्ट की अनोखी ताकत
मध्य पूर्व के ज्यादातर देश या तो अमेरिका के
करीब दिखते हैं, या सऊदी अरब और ईरान जैसे बड़े धड़ों की लाइन
में नजर आते हैं। लेकिन जॉर्डन की खासियत यह है कि उसने अरब देशों के साथ-साथ
इजराइल और पश्चिमी देशों से भी संतुलित और अच्छे रिश्ते बनाए हुए हैं।
जॉर्डन की साइलेंट ताकत और इतिहास
किंग अब्दुल्लाह और हशेमाइट राजशाही
जॉर्डन की सबसे बड़ी ताकत उसका स्थिर शासन और
उसका इतिहास है। यहां किंग अब्दुल्लाह II का हशेमाइट शाही परिवार करीब 1400
सालों से जुड़ी विरासत के साथ शासन करता आया है, जो पैगंबर
मोहम्मद के परिवार से अपने रिश्तों की जड़ें जोड़ता है, इसे यहां के लोग
सम्मान से देखते हैं।
जॉर्डन की जियोपॉलिटिकल लोकेशन
जॉर्डन की लोकेशन भी उसकी ताकत है। इसकी सीमाएं
इराक, सीरिया, इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से मिलती हैं,
यानी
यह सीधा उस हिस्से में बैठा है जहां छोटे बदलाव भी बड़े असर डाल सकते हैं।
भारत-जॉर्डन रिश्तों की नई उड़ान
75 साल की दोस्ती और 8-पॉइंट
विजन
पीएम मोदी का यह जॉर्डन दौरा उस समय हो रहा है
जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
इस मौके पर दोनों देशों ने भविष्य के लिए एक साझा विजन तैयार किया, जिसमें
रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए 8 अहम पॉइंट शामिल हैं।
‘सिर्फ अमेरिका नहीं’ का संकेत
जॉर्डन जैसे देश से रिश्ते मजबूत कर भारत यह
संदेश भी दे रहा है कि वह सिर्फ अमेरिका या किसी एक ताकत पर निर्भर रहकर अपनी
विदेश नीति नहीं चलाना चाहता। मध्य पूर्व में भी भारत सऊदी अरब और ईरान जैसे बड़े
खिलाड़ियों से आगे बढ़कर दूसरी अहम ताकतों से भी गहरे रिश्ते बना रहा है, ताकि
हर फ्रंट पर विकल्प और बैलेंस बना रहे।
व्यापार और आर्थिक रिश्ते
बड़ा ट्रेड पार्टनर बन चुका है भारत
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत और जॉर्डन के बीच
अच्छे संबंध पहले से हैं, जिन्हें इस दौरे से और रफ्तार मिलने की
उम्मीद है। भारत आज जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो
इस छोटे देश के लिए बहुत महत्व रखता है।
उर्वरक और फॉस्फेट से जुड़ा मजबूत लिंक
जॉर्डन से भारत खास तौर पर उर्वरक, फॉस्फेट
और फॉस्फोरिक एसिड खरीदता है, जो भारतीय किसानों के लिए इस्तेमाल
होने वाली खादों में प्रमुख सामग्री है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में उर्वरक की
कीमतें और सप्लाई दोनों चिंता का कारण हैं, जॉर्डन से मजबूत
रिश्ता भारत की खाद सुरक्षा के लिए भी जरूरी बन जाता है।
क्यों अहम है यह दौरा?
पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती भूमिका
पश्चिम एशिया आज ऊर्जा संकट, सुरक्षा
चुनौतियों और व्यापारिक खींचतान के बीच एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। ऐसे
माहौल में भारत का यहां सक्रिय भूमिका निभाना और अलग-अलग देशों से साझेदारी बढ़ाना,
उसे
एक जिम्मेदार और संतुलित शक्ति की छवि देता है।
लोगों से लोगों तक रिश्ता
दोनों देशों का फोकस सिर्फ सरकारों के स्तर तक
सीमित नहीं, बल्कि लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ाने पर भी है।
इसमें स्टूडेंट एक्सचेंज, टूरिज्म, हेल्थ टूरिज्म,
बिजनेस
डेलीगेशन और कल्चर से जुड़े कार्यक्रम अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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