ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर इलाके में हुए एक लूटकांड की जानकारी सुनकर हर कोई हैरान है। यहाँ एक गैंग ने लूट की वारदात सिर्फ इसलिए को अंजाम दिया क्योंकि उन्हें अपने जिम और सप्लीमेंट्स के खर्चे निकालने के लिए पैसे चाहिए थे। यह पढ़कर पहला सवाल मन में यही आता है कि आखिर जिम और सप्लीमेंट खर्च के लिए कोई व्यक्ति इतनी बड़ी वारदात पर क्यों उतर आए?
यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब स्थानीय पुलिस ने इस घटना की विस्तृत जांच की और पाया कि आरोपी अपने भारी जिम खर्चों और महंगे सप्लीमेंट्स को पूरा करने के लिए नियमित रूप से लूट की योजना बना रहे थे।
लूटकांड की पूरे तरीके से योजना कैसे बनी?
पुलिस के मुताबिक, यह गैंग पहले से ही लूट के इरादे से इलाके में घूमता था। वे ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो अकेले सफर कर रहे हों या जिनके पास नकदी और कीमती सामान हो। मात्र फिटनेस की चाह के चलते जो खर्च दिन-प्रतिदिन बढ़ा जा रहा था, उसने इन युवकों को यह गलत रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया। पुलिस ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर कई दिनों तक वे निशाने तलाशते रहे और अंततः अपने कार्यक्रम के अनुसार वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस की पूछताछ: पूरे नेटवर्क का खुलासा
पुलिस ने छानबीन की तो यह बात सामने आई कि इस टीम में कुल 6 मुख्य आरोपी थे, जो लूटपाट, जबरन वसूली और धमकी के विभिन्न मामलों से जुड़े पाए गए। पुलिस ने लूट के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर लिए हैं जिसमें देखा गया कि आरोपियों ने बदमाशी भरे ढंग से अपने शिकार को घेर लिया और उसके साथ मारपीट के बाद नकदी और मोबाइ ल चुरा लिए।
जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने लूट की वारदातों को–नोएडा और आसपास के इलाकों तक फैलाया हुआ था, लेकिन लोनी बॉर्डर इलाके में हुई वारदात ही उन्हें पकड़ने में मुख्य सबूत साबित हुई।
क्या सच में मोटिव जिम और सप्लीमेंट खर्च था?
जब पुलिस ने आरोपियों से सीधा सवाल किया, तो उन्होंने दबाव में बताया कि वे अपने जिम की फीस, महंगे सप्लीमेंट (प्रोटीन, विटामिन आदि) और स्वास्थ्य-सौंदर्य पर खर्च चला पाने में असमर्थ थे। कुछ आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि जिम का खर्च और सप्लीमेंट की लत उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी थी, जो धीरे-धीरे उनकी आर्थिक हालत को बिगाड़ने लगी थी।
एक आरोपी ने पुलिस पूछताछ में कहा कि “हम चाहते थे कि हम फिट रहें, मजबूत बनें…पर खर्च इतने बढ़ गए कि हमने फैसला किया कि कहीं से पैसे जुटाए जाएं।” यह बयान सुनकर कई लोगों ने हैरानी के साथ कहा कि अगर लोग जिम खर्च के लिए अपराध की ओर बढ़ सकते हैं, तो यह समाज में फिटनेस के प्रति बढ़ती “लत” और खर्च के नजरिये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुलिस ने आरोपी कैसे पकड़े?
पुलिस ने बताया कि लूट वाले दिन की फुटेज, मोबाइल लोकेशन डेटा और फरार अभियुक्तों के बारे में मिली मामूली जानकारी को जोड़कर उन्हें ट्रैक किया गया। इसके बाद लगातार पूछताछ, टीम-वर्क और तकनीकी सहायता से पुलिस ने दो सप्ताह की अंदर छह अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ़्तार किए गए आरोपियों से जब अधिक पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्होंने वारदातों की जानकारी आपस में साझा की थी और कुछ स्थानों पर मज़दूरी तथा अस्थायी रोजगार के बहाने घूमते थे ताकि उनके संदेहास्पद गतिविधियाँ छुपी रहें।
किस प्रकार की लूट वारदातें हुई थीं?
पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग जगहों पर मोबाइल फोन, नकद, गहने और अन्य कीमती सामान लूटे। उनमें से कुछ वारदातें ऐसी थीं जहां पीड़ित अकेले घर लौट रहे थे या दो-दो लोग गाड़ी में सफ़र कर रहे थे। ये लूट बहुत ही चालाकी से अंजाम दी जाती थीं ताकि कोई चोरियों का रिकॉर्ड खुल न पाए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एक बार वारदात के बीच में भी किसी राहगीर ने पुलिस को शंका जाहिर की थी, जिसकी वजह से जांच और कड़ी कर दी गई।
क्या यह पहली घटना थी?
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि ये आरोपी पहले भी छोटी-छोटी चोरी और धमकी जैसे मामलों में शामिल रहे हैं। लेकिन पुलिस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि इस बार उन्हें जैसा “लूट” और “कैश ग्रैब” संगठन बनाया गया था वह असामान्य रूप से बड़ा था और योजना के साथ अंजाम दिया गया।
इसके अलावा आरोपियों ने बताया कि वे जिम खर्च के लिए लूट को “आम रोज़गार का विकल्प” मानते थे, यह सोचकर कि इधर-उधर घूमकर चोरी करने से ही उन्हें पैसे मिलेंगे।
कानूनी प्रक्रिया और FIR दर्ज
पुलिस ने उन सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत FIR (अपराध दर्ज) कर लिया है। स्थानीय थाने में दर्ज एफआईआर में लूट, डकैती, धमकी, जबरन वसूली, सांघातिक व्यवधान और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे विभिन्न मामले शामिल हैं।
अब अगला कदम यह रहेगा कि आरोपियों का कानूनी परिप्रेक्ष्य से ट्रायल और सजा सुनिश्चित की जाए। अदालत में एफआईआर का पुरज़ोर समर्थन करते हुए पुलिस सबूतों को पेश करेगी और श्रुतियों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा तथा गवाहों के बयान को अदालत में साझा करेगी।
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