ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद में एक स्थानीय गायक के साथ भूमि फर्जीवाड़ा और मारपीट के मामले में न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाया है। इसी मामले में दर्ज प्राथमिकी के सात आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं को अदालत ने खारिज कर दिया है। यह फैसला स्थानीय कोर्ट द्वारा गंभीर आरोपों को ध्यान में रखकर सुनाया गया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गाजियाबाद में रहने वाले गायक मनोज वर्मा ने भोजपुर पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें स्टूडियो खोलने के लिए जमीन की आवश्यकता थी। भूमि खरीदने के इरादे से वे कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के संपर्क में आए। आरोप है कि आरोपितों ने उनसे ₹51.50 लाख की रकम ली और 4090 गज जमीन का वादा किया।
मनोज ने बताया कि शुरुआत में कुछ पैसे देने के बाद आरोपितों ने जमीन सौदे से मुकरना शुरू कर दिया। जब मनोज ने बाकी रकम भुगतान के लिए दबाव बनाया, तो आरोपितों ने उन पर और उनके मित्र पर हिंसक हमला कर दिया। दोनों पीड़ित किसी तरह वहाँ से जान बचाकर भागने में सफल हुए।
अदालत का सख्त फैसला
इस गंभीर मामले में आरोपितों अशोक कुमार, जगदेव, जगवीर, रणवीर, वीरेंद्र, प्रवीण कुमार और काजल ने अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए याचिका दाखिल की थी। लेकिन एडीजे-6 न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इन सबकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने कहा कि आरोपों की गंभीरता और सबूतों की प्रकृति को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। अदालत का मानना है कि यदि आरोपितों को अग्रिम जमानत मिल जाती तो वे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं या आगे की जांच में अड़चन पैदा कर सकते हैं।
मारपीट के एक अन्य मामले में भी जमानत खारिज
अदालत ने इसी तरह विजयनगर थाना क्षेत्र में घटित एक अलग मारपीट के मामले में भी तीन आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी है। जानकारी के अनुसार, माधोपुरा निवासी भारती के पति इंदर पर 29 अगस्त को आरोपित ईश्वर, विकास और मनोज ने हमला किया था। इंदर को गंभीर चोटें आईं और उनके सिर पर 40 टांके आए। न्यायाधीश डा. दिनेश चंद्र शुक्ला ने इस मामले में भी आरोपितों की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी। अदालत ने जोर देकर कहा कि मारपीट जैसे गंभीर मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप से पहले पूछताछ और जांच की आवश्यकता होती है।
गाजियाबाद की अदालतों द्वारा दोनों मामलों में अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करना दर्शाता है कि न्यायपालिका गंभीर अपराधों पर कड़ा रुख अपना रही है। यहां भूमि धोखाधड़ी और मारपीट जैसे मामलों में आरोपी अब बिना जांच और पूछताछ के आसानी से जमानत नहीं पा सकेंगे। इस निर्णय से पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है और यह संदेश भी गया है कि अपराध के मामलों में अदालत सहयोग करने के इच्छुक नहीं है जब तक जांच पूरी नहीं होती।
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