गाज़ियाबाद में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़: एक ही पते और मोबाइल पर बने 25 पासपोर्ट!
उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में पुलिस और पासपोर्ट विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर पर 25 से अधिक पासपोर्ट जारी किए गए। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर पांच आरोपियों सहित पोस्टमैन को गिरफ्तार किया है और जांच जांच सभी पहलुओं से कर रही है।
गाज़ियाबाद में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़: एक ही पते और मोबाइल पर बने 25 पासपोर्ट!
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उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी पता और मोबाइल नंबर के सहारे दर्जनों पासपोर्ट जारी किए गए। यह मामला पहले किसी विभागीय रिपोर्ट के कारण उजागर हुआ और बाद में पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक डाकिया (पोस्टमैन) भी शामिल है। पुलिस और पासपोर्ट विभाग अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।

 

यह मामला केवल फर्जी दस्तावेजों का नहीं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि ऐसे पासपोर्ट कैसे बनाए गए, जबकि सत्यापन प्रक्रिया में पुलिस और पासपोर्ट विभाग दोनों की भूमिका होती है।

 

पहचान कैसे हुई भारी गड़बड़ी?

इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब दिल्ली रीजनल पासपोर्ट अधिकारी ने रिज़ोनल पासपोर्ट कार्यालय के माध्यम से पुलिस को एक संदिग्ध मामले की सूचना दी। उन्हें पता चला कि भोजपुर थाना क्षेत्र के एक ही पते पर कई पासपोर्ट जारी किए गए हैं, और सभी में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज है। जांच में यह भी पता चला कि इन पासपोर्टों में लिखे पते पर कोई व्यक्ति या परिवार वास्तव में नहीं रहता, जिससे साफ संकेत मिलता है कि यह मामला धोखाधड़ी का है।

 

कैसे काम कर रहा था रैकेट?

पुलिस आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। डाकिया अरुण कुमार ने अपना पक्ष बताया कि लगभग 5 महीने पहले दो व्यक्ति — विवेक गांधी और प्रकाश — उसके पास आए और कहा कि उनके पासपोर्ट उस पते पर नहीं भेजे जाएं, बल्कि उन्हें सीधे दे दिए जाएं। इसके लिए वे प्रति पासपोर्ट ₹2000 देने को तैयार थे। गुरूर में लालच के कारण पोस्टमैन ने पासपोर्टों को गलत व्यक्तियों को दे दिया।

 

यह पूरा खेल सिर्फ़ पासपोर्ट भेजने का नहीं था, बल्कि पाकिस्तान, विदेश यात्रा या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता था — पुलिस इसी संभावना की भी जांच कर रही है।

 

पुलिस की भूमिका पर सवाल

पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में पुलिस वेरिफिकेशन, स्थान सत्यापन और दस्तावेज की जांच होती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर सत्यापन और जांच हुआ है तो 25 पासपोर्ट एक ही पते और मोबाइल पर कैसे जारी हो गए? पुलिस अभी तक इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रही है।

 

पासपोर्ट विभाग की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे विभागीय जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। जांच परिणाम आने तक यह दोनों विभागों की बड़ी लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।

 

FIR और गिरफ्तारी: कौन गिरफ्तार?

पुलिस ने कुल 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसमें शामिल लोगों में अमनप्रीत कौर, जसप्रीत कौर, रितु शर्मा, मेघा राणा, राजकुमारी दलजीत सिंह, महेंद्र कौर, यशोदा राय, बसंती राय, जीत कौर, शमशेर सिंह और पोस्टमैन अरुण कुमार के नाम शामिल हैं। इनके खिलाफ साइबर और धांधली से जुड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

 

पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में एक महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग इस जालसाजी में किया गया था।

 

क्या यह सिर्फ एक रैकेट था?

जांच के शुरुआती चरण में पुलिस यह भी पता लगा रही है कि यह मामला केवल फर्जी पासपोर्ट जारी कराने तक सीमित नहीं था। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इससे जुड़ा नेटवर्क कहीं और बड़े पैमाने पर दस्तावेज जालसाजी, मानव तस्करी, या अपराधियों की विदेश जाने में मदद भी कर रहा हो सकता है — इसलिए जांच को गहरे स्तर पर लिया जा रहा है।

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि इन पासपोर्टों का इस्तेमाल कहाँ किया गया, इस पर अब भी जांच जारी है, और यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इन्हें पहले भी अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया था कि नहीं।

 

क्या पुलिस‑पासपोर्ट विभाग में मिलीभगत थी?

यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसके जवाब खोजने के लिए पुलिस अपनी जांच में लगी हुई है। यह असामान्य बात है कि इतने सारे पासपोर्ट बिना किसी असामान्य अनुमति के जारी हो सकते हैं, जबकि वेरिफिकेशन प्रक्रिया सख्त होती है। ऐसे में कई अफसर यह संभावना भी देख रहे हैं कि विभागीय लोग या स्थानीय मंज़ूर करने वाले अधिकारियों की मिलीभगत इस खेल में शामिल रही हो सकती है। पुलिस इस दिशा में भी अपनी तहकीकात कर रही है।

 

स्थानीय बदलाव और सुरक्षा चिंताएँ

यह मामला न केवल गाज़ियाबाद या उत्तर प्रदेश की चिंता है, बल्कि पूरे देश के यात्रियों और पासपोर्ट धारकों के लिए सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। कई लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि अगर इसी तरह की गलत जानकारी के आधार पर दस्तावेज जारी हो सकते हैं, तो राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की पहचान कितनी सुरक्षित है?

 

भविष्य की कार्रवाई क्या हो सकती है?

पुलिस अब पासपोर्ट विभाग और स्थानीय अधिकारियों के प्रक्रियाओं का भी फिर से ऑडिट कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे ऐसी भूल दोबारा न हो। इसके अलावा पुलिस और पासपोर्ट विभाग दोनों को यह समझना होगा कि जांच और सत्यापन प्रक्रिया कैसे मजबूत बन सके ताकि नागरिकों के मूल दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

 

पुलिस का कहना है कि फर्जी पासपोर्ट रैकेट का कोई भी हिस्सा छोड़ा नहीं जाएगा और सभी संबंधित लोगों को सख्ती से कानून के तहत लाया जाएगा, चाहे वे स्थानीय हों, विभागीय अधिकारी हों, या कोई गैंग सदस्य।

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